(Illegal Immigration Demographic Change) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 10 सितंबर को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई और एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह समिति देश में अवैध घुसपैठ के कारण हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करेगी और उससे निपटने के लिए ठोस सुझाव पेश करेगी। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री ने कैबिनेट को पूरी जानकारी दी और प्रस्ताव को ‘ऑन टेबल एजेंडा’ के रूप में रखा गया था।
प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद उठाया गया कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में स्पष्ट कहा था कि (Illegal Immigration Demographic Change) देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने ‘डेमोग्राफी मिशन’ शुरू करने की घोषणा की थी और चेतावनी दी थी कि अवैध घुसपैठिए आदिवासियों को गुमराह कर उनकी जमीनें हथिया रहे हैं। हाल ही में असम दौरे के दौरान भी पीएम ने इस विषय को दोहराया और कहा कि योजनाबद्ध तरीके से देश की जनसांख्यिकी को बदलने की कोशिश की जा रही है।
समिति का फोकस रहेगा सीमावर्ती राज्यों पर
सूत्रों का कहना है कि नई गठित समिति में सुरक्षा प्रतिष्ठानों और कई राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति का प्राथमिक ध्यान उन सीमावर्ती इलाकों पर रहेगा, जहां पिछले कुछ वर्षों में जनसांख्यिकीय बदलाव साफ दिखाई दे रहे हैं। (Illegal Immigration Demographic Change) की आशंका को सुरक्षा एजेंसियों ने पहले भी कई बार रेखांकित किया है।
गृहमंत्री ने बताई थी ‘सुनियोजित साजिश’
पिछले महीने आयोजित ‘वाइब्रेंट विलेजेज’ कार्यक्रम में गृह मंत्री ने कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे बदलाव कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिवों और सुरक्षा बलों को इस पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए थे। सूत्रों का कहना है कि यूरोपीय आयोग भी इसी तरह का अध्ययन कर रहा है और उसने ‘Demography Toolbox’ तैयार किया है, ताकि जनसांख्यिकीय असंतुलन से निपटने के लिए कानूनी और नीतिगत उपाय तय किए जा सकें।
चुनावी राज्यों में और गरमाएगा मुद्दा
(Illegal Immigration Demographic Change) का असर राजनीति पर भी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश और असम के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पहले ही अपनी रिपोर्ट में नेपाल और बांग्लादेश से सटी सीमाओं पर हुए जनसांख्यिकीय बदलावों का जिक्र किया था। आने वाले महीनों में बिहार, असम और पश्चिम बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अवैध घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने की पूरी संभावना है।





