Sitamarhi Fake Aadhaar Racket का पर्दाफाश परिहार थाना क्षेत्र में हुआ, जहाँ भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय एक गिरोह लंबे समय से विदेशी नागरिकों के फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम कर रहा था। पुलिस ने छापेमारी कर पाँच सीएससी संचालकों को गिरफ्तार किया और उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल, सीपीयू समेत कई अहम दस्तावेज जब्त किए।
कैसे हुआ खुलासा?
प्रशासन को लगातार शिकायत मिल रही थी कि सीमा क्षेत्र में कुछ ऑपरेटर नेपाली नागरिकों और अन्य विदेशी मूल के लोगों को भारतीय नागरिक दर्शाकर आधार कार्ड (Sitamarhi Fake Aadhaar Racket) जारी कर रहे हैं। जांच के दौरान तीन संदिग्ध आधार कार्ड भी सामने आए, जिनमें से एक का संबंध सीधे नेपाल से होने की पुष्टि हुई।
गिरफ्तार हुए आरोपी
पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें मच्छपकौनी गाँव के चंद्रनाथ प्रताप उर्फ मुरारी कुमार, कन्हवां बाजार वार्ड नंबर सात के सुनील कुमार, कन्हवां बाजार वार्ड नंबर छह के साइबर कैफे संचालक बृजनंदन कुमार, मच्छपकौनी गाँव के रघुनाथ कुमार और भुतही थाना क्षेत्र के मधेसरा गाँव के अनिल कुमार शामिल हैं। सभी पर आरोप है कि ये लोग पैसों के लालच में विदेशी नागरिकों के लिए फर्जी आधार कार्ड बनाते थे।
जांच में क्या मिला?
छापेमारी के दौरान टीम को कई लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज मिले। पूछताछ में आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और जांच को गुमराह करने की कोशिश करते रहे। लेकिन कड़ाई से पूछताछ के बाद इन्होंने स्वीकार किया कि अधिक पैसे के लिए वे इस अवैध काम में शामिल हुए थे।
सुरक्षा पर मंडराता खतरा
Sitamarhi Fake Aadhaar Racket के ज़रिए फर्जी दस्तावेज तैयार करना केवल अपराध ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। पुलिस का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि संगठित गिरोह विदेशी नागरिकों को भारतीय पहचान देकर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा था।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की तह तक जाने और इससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुँचने के लिए विशेष टीम गठित की जाएगी।





