सीजी भास्कर 29 सितंबर कैंसर अब भी दुनिया की सबसे घातक बीमारियों में से एक है। भारत में भी हर साल लाखों लोग इस बीमारी से जूझते हैं। ऐसे समय में IIT Madras Cancer Genome Bank की शुरुआत एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह पहल कैंसर मरीजों को उनके जीन और टिशू के हिसाब से बेहतर और व्यक्तिगत इलाज (Personalised Treatment) दिलाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।
कैसे काम करेगा IIT Madras Cancer Genome Bank?
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है देश भर के कैंसर रोगियों से करीब सात हज़ार ट्यूमर सैंपल इकट्ठा करना और उन्हें लैब में संरक्षित करना। इन सैंपल्स पर अलग-अलग दवाओं और थेरेपी का परीक्षण होगा। नतीजों के आधार पर डॉक्टर पहले से जान पाएंगे कि कौन सा इलाज किस मरीज पर बेहतर असर डालेगा।
यानी IIT Madras Cancer Genome Bank डॉक्टरों को अनुमान पर नहीं, बल्कि ठोस डेटा पर आधारित इलाज तय करने में मदद करेगा।
भारतीय मरीजों के लिए क्यों है खास?
शोधकर्ताओं की मानें तो भारतीय मरीजों में पाए जाने वाले जीन म्यूटेशन (Gene Mutation) कई बार पश्चिमी देशों से अलग होते हैं। हाल ही में एक खास स्तन कैंसर में ऐसा म्यूटेशन मिला जो भारत में आम है लेकिन विदेशों में नहीं।
यह खोज बताती है कि विदेशी डेटा पर पूरी तरह निर्भर होना सही नहीं, बल्कि भारत-विशिष्ट रिसर्च और IIT Madras Cancer Genome Bank जैसे कदम बेहद जरूरी हैं।
भारत कैंसर जीनोम एटलस से जुड़ाव
यह बैंक ‘भारत कैंसर जीनोम एटलस’ (Bharat Cancer Genome Atlas) का हिस्सा होगा। इसमें देश भर से कैंसर मामलों का जीनोमिक डेटा शामिल किया जाएगा। यह जानकारी डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगी कि कौन सी दवा या थेरेपी भारतीय मरीजों के लिए ज्यादा प्रभावी है।
सीधे शब्दों में कहें तो IIT Madras Cancer Genome Bank भारत में प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine) की राह खोल सकता है।
मरीजों को कैसे होगा फायदा?
कैंसर का हर केस अलग होता है। किसी पर दवा तुरंत असर करती है, तो किसी पर नहीं। यही वजह है कि टिशू बैंक और जीनोम डेटा बेहद अहम हैं।
अगर डॉक्टरों को पहले से पता हो कि किस मरीज पर कौन सा इलाज असरदार है, तो न सिर्फ समय बचेगा बल्कि सही दवा भी समय पर दी जा सकेगी। नतीजतन, साइड इफेक्ट कम होंगे और मरीज को बेहतर जीवन गुणवत्ता मिलेगी।
कैंसर रिसर्च और भविष्य की दिशा
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में इलाज का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। सामान्य थेरेपी की बजाय हर मरीज को उसके जीन प्रोफ़ाइल के मुताबिक ट्रीटमेंट मिलेगा। इस दिशा में IIT Madras Cancer Genome Bank भारत की मेडिकल रिसर्च को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है।





