सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आप उसी आरक्षण के साथ चुनाव जारी रखें जो पहले से था
हाई कोर्ट ने स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग को 42 प्रतिशत कोटे पर रोक लगाई थी
सीजी भास्कर, 17 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को तेलंगाना सरकार को बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने (Telangana Reservation Case) तेलंगाना सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश के तहत स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण देने वाले सरकारी आदेश पर रोक लगाई गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “आप उसी आरक्षण के साथ चुनाव जारी रखें जो पहले से था।” तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने 26 सितंबर को स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने संबंधी सरकारी आदेश (जीओ) जारी किया था। कांग्रेस शासित राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 9 अक्टूबर के तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने इस जीओ पर अंतरिम रोक लगाई थी।
याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि उसका आदेश उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के मेरिट पर विचार को प्रभावित नहीं करेगा। हाई कोर्ट ने उन याचिकाओं पर आदेश पारित किया था, जिनमें कहा गया था कि जीओ ने स्थानीय निकायों में कुल आरक्षण को 67 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था, जो कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों में निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन करता है।
तेलंगाना सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश राज्य सरकार के लिए “बहुत अधिक प्रभावित करने वाला” है। इस पर पीठ ने कहा, “आप चुनाव जारी रखें, लेकिन आप आरक्षण का प्रतिशत बढ़ा रहे हैं।” अदालत ने स्पष्ट किया कि (Telangana Reservation Case) से संबंधित याचिकाएं हाई कोर्ट में अपने merit के आधार पर तय की जाएंगी।
यह फैसला कांग्रेस शासित तेलंगाना सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण का सीधा असर मतदाता समीकरणों पर पड़ सकता है।


