सीजी भास्कर, 13 जून। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन मकान पर तहसील प्रशासन द्वारा दूसरी बार स्टे आदेश लगाए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम सेमरकोना निवासी देवेंद्र कश्यप ने कलेक्टर मुंगेली को विस्तृत आवेदन सौंपकर आरोप लगाया है कि उनकी निजी भूमि पर बन रहे प्रधानमंत्री आवास को बिना स्पष्ट सीमांकन और चिन्हांकन के बार-बार रोका जा रहा है। इससे उनका परिवार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहा है। (PM Awas Yojana Stay Order Controversy)
- 10 जांच और 3 सीमांकन के बाद भी नहीं हुआ समाधान : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
- स्टे आदेश पर उठाए सवाल
- बरसात से बढ़ी चिंता, लाखों के नुकसान का डर : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
- जिला स्तरीय टीम से निष्पक्ष सीमांकन की मांग
- बेलसरी में निर्माण को बताया मजबूरी : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
- ‘आपत्ति है तो आवास निरस्त कर दीजिए’
- कलेक्टर से रखीं पांच प्रमुख मांगें
- अब प्रशासनिक फैसले पर टिकी निगाहें : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
- क्या बोले अपर कलेक्टर
बता दें कि देवेंद्र कश्यप के अनुसार ग्राम बेलसरी स्थित खसरा नंबर 143/3 की निजी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान 29 जनवरी 2026 को तहसीलदार लोरमी ने निर्माण कार्य पर स्टे लगा दिया। इसके चलते करीब चार माह तक निर्माण पूरी तरह बंद रहा। बाद में 4 जून 2026 को स्टे हटाए जाने से उन्हें राहत मिली, लेकिन महज चार दिन बाद 8 जून को फिर नया स्टे आदेश जारी कर दिया गया।
आवेदक का कहना है कि लगातार बदलते आदेशों के कारण उनका परिवार गहरे तनाव में है। उनका आरोप है कि प्रशासन मामले में स्पष्ट स्थिति सामने नहीं ला पा रहा है, बावजूद इसके निर्माण कार्य को बार-बार रोका जा रहा है।
10 जांच और 3 सीमांकन के बाद भी नहीं हुआ समाधान : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
देवेंद्र कश्यप ने आवेदन में दावा किया है कि पूरे मामले में अब तक करीब 10 बार जांच दल मौके पर पहुंच चुका है और तीन बार भूमि का सीमांकन भी कराया जा चुका है। इसके बावजूद प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उनकी निजी भूमि का वास्तविक क्षेत्र कौन-सा है और उसका मौके पर चिन्हांकन क्यों नहीं किया जा रहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बार-बार जांच और सीमांकन कराया जा चुका है, तब भी यदि जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है तो इसका खामियाजा एक गरीब हितग्राही को क्यों भुगतना पड़ रहा है।
स्टे आदेश पर उठाए सवाल
आवेदन में वर्तमान स्टे आदेश को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। देवेंद्र का कहना है कि प्रशासन यह दावा कर रहा है कि निर्माण का कुछ हिस्सा निजी भूमि और कुछ हिस्सा शासकीय भूमि पर स्थित है, लेकिन आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि विवादित हिस्सा कौन-सा है और कौन-सा भाग शासकीय भूमि में आता है।
उनका कहना है कि यदि केवल किसी हिस्से को लेकर विवाद है तो पूरे निर्माण कार्य पर रोक लगाना उचित नहीं है। पहले विवादित क्षेत्र का स्पष्ट चिन्हांकन किया जाना चाहिए, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
बरसात से बढ़ी चिंता, लाखों के नुकसान का डर : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
देवेंद्र ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और ऐसे समय में निर्माण कार्य बंद रहने से आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है। निर्माण सामग्री खराब होने लगी है और अब तक लगभग 50 बोरी सीमेंट खराब हो चुकी है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो मकान लंबे समय तक अधूरा रह सकता है, जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य भी प्रभावित होगा।
जिला स्तरीय टीम से निष्पक्ष सीमांकन की मांग
आवेदक ने कलेक्टर से मांग की है कि तहसील स्तर के बजाय जिला स्तर पर सक्षम अधिकारियों की एक निष्पक्ष टीम गठित कर भूमि का पुनः सीमांकन और चिन्हांकन कराया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी कुल 13 डिसमिल निजी भूमि का वास्तविक क्षेत्र मौके पर चिन्हित कर उन्हें कब्जा दिलाया जाए।
देवेंद्र ने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष जांच में उनकी भूमि का कोई हिस्सा शासकीय भूमि में पाया जाता है तो वे स्वयं उस हिस्से पर किए गए निर्माण को हटाने के लिए तैयार हैं।
बेलसरी में निर्माण को बताया मजबूरी : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि प्रधानमंत्री आवास उनकी पारिवारिक सदस्य विमला बाई के नाम से स्वीकृत हुआ है। इसका निर्माण ग्राम बेलसरी में पंचायत और आवास मित्र की जानकारी तथा सहमति से कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ग्राम सेमरकोना और बेलसरी एक-दूसरे से सटे हुए गांव हैं और दोनों के बीच केवल एक पुल का अंतर है। सेमरकोना में उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण निजी भूमि पर बेलसरी में निर्माण कराया गया।
देवेंद्र का कहना है कि उनकी मंशा किसी प्रकार का अतिक्रमण करने की नहीं थी। मकान निर्माण में केवल छत डालने का कार्य शेष है। यदि शुरुआत में ही आपत्ति दर्ज कराई जाती तो वह निर्माण कार्य शुरू ही नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से परेशान करने के उद्देश्य से बार-बार कार्रवाई की जा रही है।
‘आपत्ति है तो आवास निरस्त कर दीजिए’
अपने आवेदन में देवेंद्र कश्यप ने कहा है कि यदि प्रशासन को बेलसरी में प्रधानमंत्री आवास निर्माण को लेकर कोई वैधानिक आपत्ति है तो विमला बाई के नाम से स्वीकृत आवास को निरस्त कर दिया जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि शासन से प्राप्त आवास की राशि वापस करने के लिए भी वह तैयार हैं।
हालांकि उन्होंने मांग की कि उनकी 13 डिसमिल निजी भूमि का सीमांकन, चिन्हांकन और कब्जा उन्हें दिलाया जाए, जिसके लिए वह कई महीनों से प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
कलेक्टर से रखीं पांच प्रमुख मांगें
आवेदक ने कलेक्टर मुंगेली से पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें 8 जून 2026 के स्टे आदेश की समीक्षा कर उसे हटाना, जिला स्तरीय टीम से पुनः सीमांकन कराना, कथित शासकीय भूमि के विवादित हिस्से को स्पष्ट करना, निजी भूमि पर निर्माण कार्य की अनुमति देना तथा लंबे समय से लंबित मामले का शीघ्र निराकरण कर न्याय दिलाना शामिल है।
अब प्रशासनिक फैसले पर टिकी निगाहें : PM Awas Yojana Stay Order Controversy
लगातार चार माह से अधिक समय से चल रहे इस विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर हितग्राही अपनी निजी भूमि पर निर्माण होने का दावा कर रहा है, वहीं प्रशासन शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की आशंका जता रहा है। ऐसे में निष्पक्ष सीमांकन और स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय ही इस मामले का स्थायी समाधान निकाल सकता है। फिलहाल पूरे प्रकरण पर जिले के लोगों और प्रशासनिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।
क्या बोले अपर कलेक्टर
इस पूरे मामले पर अपर कलेक्टर जी.एल. यादव ने कहा कि उन्हें आवेदन प्राप्त हुआ है। आवेदनकर्ता द्वारा प्रस्तुत मांगों और शिकायतों पर नियमानुसार तथा न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आवेदक और उनके परिवार को आश्वस्त किया कि जो भी विधिसम्मत कार्रवाई होगी, उसे प्राथमिकता के साथ किया जाएगा। साथ ही उनकी निजी भूमि की पहचान और सीमांकन सुनिश्चित कर न्याय दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।




