सीजी भास्कर, 30 अक्टूबर। सरगुजा राजपरिवार के स्वामित्व वाले अलखनंदा टाकीज का लाइसेंस दुर्भावनापूर्ण तरीके से निरस्त करने के 33 साल पुराने बहुचर्चित मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी माना है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि छतवाल राजपरिवार को ब्याज सहित ₹34,795 की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करें। यह मामला वर्ष 1992 का है, जब टीएस सिंहदेव (TS Singhdeo Case) द्वारा संचालित अलकनंदा टाकीज का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था।
लाइसेंस निरस्ती की यह कार्रवाई उस राजनीतिक हलचल के बीच हुई थी, जब वाड्रफनगर के बिजाकुरा गांव में विशेष पिछड़ी जनजाति के रिबई पंडो और उसके परिवार के दो अन्य बच्चों की भूख से मौत की घटना ने तूल पकड़ा हुआ था। राजपरिवार की सदस्य (देवेंद्र कुमारी सिंहदेव) (TS Singhdeo Case) ने इस मामले को लेकर तत्कालीन कलेक्टर के निलंबन की मांग की थी। भूख से मौत का यह मुद्दा इतना संवेदनशील बन गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को अप्रैल 1992 में स्वयं वाड्रफनगर आकर स्थिति का जायजा लेना पड़ा था।
जानिए क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला सरगुजा जिला (TS Singhdeo Case) से जुड़ा हुआ है, जहां राजपरिवार के अरुणेश्वर शरण सिंहदेव के भाई की स्वामित्व वाली अलकनंदा टाकीज को नियमानुसार दो मार्च को सिनेमा संचालन का लाइसेंस जारी किया गया था। टाकीज का संचालन उनके बड़े भाई टीएस सिंहदेव कर रहे थे। इसी दौरान आदिवासी परिवार की भूख से मौत की घटना ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी।
इस मुद्दे को पूर्व मंत्री वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव ने जोरदार तरीके से उठाया था। उस समय प्रदेश में भाजपा के सुंदरलाल पटवा की सरकार थी। बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच 19 अप्रैल 1992 को तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल ने (अलकनंदा टाकीज) (TS Singhdeo case) का लाइसेंस निरस्त करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस का जवाब देने की अंतिम तिथि 23 अप्रैल थी, लेकिन 24 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट ने सिंहदेव परिवार के पक्ष में स्थगन आदेश जारी कर दिया।
अब कलेक्टर को देना होगा इतना जुर्माना
सिंहदेव के अधिवक्ता ने उसी दिन शपथपत्र सहित यह आदेश कलेक्टर को देने की कोशिश की परंतु कलेक्टर ने मिलने से इन्कार कर 24 अप्रैल की दोपहर (अलकनंदा टाकीज का संचालन) (TS Singhdeo case) रोक दिया और 24 एवं 25 अप्रैल के चार शो नहीं चल सके। सिंहदेव ने आठ हजार रुपये की क्षति की जानकारी देते हुए क्षतिपूर्ति की मांग की। न्यायालय में आबकारी आयुक्त ने बताया कि उनके कार्यालय में अलकनंदा टाकीज के लाइसेंस निरस्तीकरण से संबंधित कोई फाइल उपलब्ध नहीं है।
बिलासपुर उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी पाते हुए ब्याज सहित ₹34,795 की क्षतिपूर्ति राशि राजपरिवार को देने का आदेश दिया। यह राशि न्यायालय में जमा करा दी गई है।


