सीजी भास्कर, 31 अक्टूबर। केंद्र सरकार ने देश में दाल उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को सस्ते विदेशी आयात से हो रहे नुकसान से बचाने के लिए पीली मटर (Pulses Import Duty) पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। यह आदेश 1 नवंबर से लागू होगा। सरकार के इस फैसले से किसानों को राहत मिलेगी और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन को नई गति मिलेगी।
इस कदम को आत्मनिर्भर भारत अभियान (Pulses Import Duty) की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। अब किसान न केवल उत्पादक रहेंगे, बल्कि बाजार के निर्णायक भागीदार भी बनेंगे। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब सस्ते विदेशी आयात से दाल बाजार असंतुलित हो गया था और किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी कम दामों पर बेचनी पड़ रही थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया घोषणा
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के साथ यह नीति सीधे जुड़ी मानी जा रही है। हालांकि, 31 अक्टूबर तक के बिल ऑफ लैडिंग वाले जहाजों की खेपों को शुल्क से छूट दी गई है। दिसंबर 2023 में पीली मटर को ड्यूटी-फ्री (Pulses Import Duty) कर दिया गया था, जिसके बाद रूस और कनाडा से आयात में बेतहाशा वृद्धि हुई।
इससे घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ा और किसानों को एमएसपी से कम दाम पर फसलें बेचनी पड़ीं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 67 लाख टन दालें आयात कीं, जिनमें 30 लाख टन सिर्फ पीली मटर थी। आयातित मटर की औसत कीमत 3,500 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि अरहर, उड़द और मूंग का एमएसपी 7,000 से 8,000 रुपये के बीच था।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक दालों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। देश में वर्तमान मांग करीब 2.75 से 2.9 करोड़ टन है, जबकि उत्पादन लगभग 2.4 करोड़ टन के आसपास है। शुल्क बढ़ने से आयात महंगा होगा, जिससे देसी दालों की मांग बढ़ेगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा। इससे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और झारखंड जैसे प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों को सीधा लाभ होगा।
अरहर की शत-प्रतिशत एमएसपी पर होगी खरीद
वर्तमान में अरहर की कीमतें एमएसपी (7,550 रुपये) के मुकाबले 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे हैं। उड़द का भाव 6,150 रुपये और मूंग 6,557 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि उनके एमएसपी क्रमशः 7,400 और 8,682 रुपये हैं। केंद्र सरकार ने अब तीनों फसलों की शत-प्रतिशत एमएसपी पर खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण शुरू कर दिया है। यदि यह प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से लागू हुई, तो किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।


