सूदखोरी और दबाव बनाकर वसूली से जुड़े मामले में फरार चल रहे रोहित तोमर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने Fugitive Search अभियान को और आक्रामक बना दिया है। इसी केस में पकड़े गए वीरेंद्र सिंह तोमर को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जिसके बाद अब पूरी कार्रवाई रोहित की तलाश पर केंद्रित हो गई है।
पुलिस को कई राज्यों में कनेक्शन की आशंका
जांच में मिले संकेतों के अनुसार रोहित कई राज्यों में फैले नेटवर्क का सहारा ले सकता है, जिसकी वजह से सुरक्षा एजेंसियों ने इसे एक “Multi-State Fugitive Search ” की तरह संभालना शुरू कर दिया है। पुलिस का अनुमान है कि रोहित करणी सेना से जुड़े किसी पदाधिकारी के घर पर छिपा हो सकता है। इसी दिशा में कई संभावित संपर्कों की सूची तैयार की गई है और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
कोर्ट में पेशी के दौरान बढ़ी हलचल, कई समर्थक पहुंचे
वीरेंद्र की पेशी के समय कोर्ट परिसर और जेल परिसर के बाहर अचानक भीड़ बढ़ गई। समर्थकों की उपस्थिति और नारेबाजी को देखते हुए अधिकारी पहले से ज्यादा सतर्क रहे। पूरी स्थिति की वीडियोग्राफी कराई गई और वहां मौजूद हर चेहरे की पहचान की जा रही है, ताकि पता चल सके कि इनमें से किन लोगों के जरिए रोहित को शरण मिलने की संभावना थी।
पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला एक “Sensitive Network” की तरह काम कर रहा है, जिसमें कई स्थानीय लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
फरारी के दौरान मिले सुरागों के आधार पर नई रणनीति
वीरेंद्र 162 दिनों तक फरार रहने के बाद जेल पहुंचा था, और इसी अवधि में पुलिस को कई ऐसे इनपुट मिले थे जिनसे संकेत मिलते हैं कि रोहित इसी नेटवर्क के जरिए बाहर छिपा बैठा है। अधिकारियों ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अब गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश में करणी सेना से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी की जा रही है।
इस कार्रवाई को “Targeted Fugitive Search” बताया जा रहा है, जिसमें हर राज्य की स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बनाया जा रहा है।
गिरफ्तारी से केस की दिशा बदलने की उम्मीद
जांच एजेंसियों का मानना है कि रोहित की गिरफ्तारी से सूदखोरी, धमकी और वसूली के मामलों में कई अहम खुलासे हो सकते हैं। साथ ही इससे मुकदमे की दिशा और मजबूत होगी, क्योंकि इस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली और आर्थिक लेनदेन की पूरी तस्वीर सामने आने की संभावना है।
पुलिस की लगातार छापेमारी और कड़ी रणनीति से संकेत मिलते हैं कि लंबे समय तक छिपे रहना अब रोहित के लिए आसान नहीं होगा।





