छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल है, और इसकी वजह है सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े कथित Public Asset Scam का आरोप। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने सीबीआई से इस पूरे मामले की तुरंत जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि नागरनार स्टील प्लांट, बैलाडिला खदानों और भविष्य में होने वाली राजस्व क्षति को मिलाकर जो अनियमितताएँ सामने आई हैं, वे (Financial Irregularity) की श्रेणी में आती हैं और राज्य की आर्थिक संरचना पर सीधा प्रभाव डालती हैं।
Public Asset Scam: नागरनार प्लांट व बैलाडिला खदानों को लेकर उठे गंभीर सवाल
जोगी ने आरोप लगाया कि नागरनार स्टील प्लांट की लगभग 26,000 करोड़ रुपये की संपत्ति और बैलाडिला आयरन ओरे ब्लॉक की करीब 85,000 करोड़ रुपये मूल्य वाली खनिज संपत्ति को निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएँ हुईं।
उनका दावा है कि यह सिर्फ सौदे का मामला नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के राजस्व—लगभग 40,000 करोड़ रुपये—की संभावित हानि भी दर्शाता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने प्रधानमंत्री के पुराने सार्वजनिक बयान और बाद में जारी तकनीकी रिपोर्टों के बीच गहरी विसंगतियों को (Asset Misuse) का संकेत बताया।
Public Asset Scam: शेयर बिक्री, पर्यावरण अनुमति और भूमि अधिग्रहण की समयरेखा पर भी सवाल
जोगी द्वारा जारी की गई समयरेखा में कहा गया है कि 29 अक्टूबर 2025 को एनएमडीसी बोर्ड ने नागरनार प्लांट के 90% शेयर निजी कंपनी को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी। इसके बाद 1 नवंबर को स्लरी पाइपलाइन को पर्यावरण अनुमति मिली, फिर 7 नवंबर को इस्पात मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति आई।
9 नवंबर की अधिसूचना में ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को हरी झंडी दी गई। उनके अनुसार, इन फैसलों के बीच का तेज़ क्रमबद्ध संपर्क कई तकनीकी और कानूनी प्रश्न खड़े करता है।
इसी के साथ कोयला आयात में 120 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप भी शामिल है, जिसमें एक ऐसी अमेरिकी कंपनी का ज़िक्र है जिसकी वास्तविक मौजूदगी पर सवाल उठ रहे हैं।
Public Asset Scam: कानूनों के उल्लंघन का दावा, 15 दिन का अल्टीमेटम
जोगी ने कहा है कि यह पूरा मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, धन शोधन निवारण अधिनियम 2014 और पेसा कानून 1996 के संभावित उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
उन्होंने मांग की है कि निजीकरण से जुड़े सभी प्रस्ताव तत्काल वापस लिए जाएँ, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और नागरनार प्लांट को स्थायी सार्वजनिक इकाई घोषित करने की कानूनी गारंटी दी जाए।
साथ ही 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो राज्यभर में व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।





