सीजी भास्कर 17 नवम्बर परिवार की खुशियां क्यों बनी आफत – (Bridegroom Family Tragedy)
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के दाढ़ी गांव में सोमवार की सुबह हुआ हादसा पूरे क्षेत्र को अविश्वसनीय सदमे में डाल गया। जिस घर में शादी की रोशनी और तैयारियां तेज़ी से चल रही थीं, उसी घर की भाभी ने अपनी दो मासूम बेटियों के साथ आग लगाकर जान दे दी। तीनों की मौके पर हुई मृत्यु ने गांव में ऐसा सन्नाटा बिखेरा कि लोग शब्द तक नहीं खोज पा रहे हैं। यह घटना (family dispute) और मानसिक तनाव की ओर भी इशारा करती है।
सुबह की खामोशी में छिपा तूफान – घर में चल रहीं तैयारीयां थमीं
दाढ़ी गांव में देवर जितेंद्र की बारात अगले दिन बरेली जाने वाली थी। सोमवार को भोजन कार्यक्रम था, घर में रिश्तेदार आ चुके थे, और रसोई से उठती पकवानों की खुशबू खुशी की गवाही दे रही थी। तभी सुबह करीब 5:30 बजे आरती (27) अपनी बेटियों—पीहू (7) और दृष्टि (2)—को कमरे में ले गई और भीतर से कुंडी चढ़ा दी।
कुछ ही देर बाद धुआं उठता दिखा और लोग हालात समझ पाते उससे पहले भीतर सब कुछ खत्म हो चुका था।
बरसी चीखें और टूटा दरवाजा – लेकिन बच न सकीं तीनों जानें
घर और पड़ोस की महिलाओं की चीखें सुनकर लोग इकट्ठा हुए। दरवाजा तोड़ा गया, कंबल डालकर आग बुझाई गई, पर तब तक तीनों गंभीर रूप से जल चुकी थीं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचते ही डॉक्टरों ने आरती और पीहू को मृत घोषित कर दिया। छोटी दृष्टि को झांसी मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया।
इस घटना ने पूरे गांव पर गहरी छाया डाल दी—जहां शहनाई गूंजनी थी, वहां अब मातम पसरा है। यह क्षण वाकई (community grief) का प्रतीक बन गया।
पड़ताल में उभरी पारिवारिक कलह की कड़वी परतें – जांच जारी
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के मुताबिक, आरती कुछ समय से घरेलू विवादों के चलते मानसिक तनाव में थी। उसका पति देवेंद्र बलिया में पानीपूरी का काम करता था और लंबे समय तक घर से बाहर रहता था। बड़े भाई के रूप में जिम्मेदारियां, छोटे भाइयों की नौकरी और शादी की तैयारियों के बीच आरती की निजी तकलीफें अनसुनी रह गईं—यही बात अब जांच का बड़ा विषय बनी हुई है।
मौके पर पहुंचे अधिकारी परिवार से अलग-अलग बयान दर्ज कर रहे हैं, जबकि फ़ोरेंसिक टीम भी (incident analysis) में जुटी है।
गांव में पसरा सन्नाटा – उत्सव के बीच ऐसा हादसा पहली बार
तीनों शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए हैं। शादी वाले घर में रोने की आवाजों ने हर तरफ़ वातावरण को भारी कर दिया है। जहां बारात की हंसी और ढोलक बजने वाली थी, वहां आज केवल आंसू और चीत्कारें सुनाई दे रही हैं। लोग इस बात को समझ नहीं पा रहे कि एक खुशहाल माहौल इतनी अचानक एक त्रासदी में कैसे बदल गया।





