सीजी भास्कर, 19 नवंबर। पाकिस्तान के आतंकी संगठन के नेटवर्क से जुड़े दो नाबालिगों को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ISIS Module Chhattisgarh) ने रायपुर के टिकरापारा और भिलाई के सुपेला क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद दोनों को किशोर न्यायालय में पेश कर बाल संप्रेषण गृह भेज दिया गया। एटीएस काफी समय से सोशल मीडिया पर नजर रखे हुई थी, जिसमें दोनों के ( Terror Network India ) आईएसआईएस नेटवर्क से जुड़े होने के इनपुट मिले थे। जांच में पता चला कि उनकी बातचीत सीधे शीर्ष आतंकियों से हो रही थी।
उक्त आतंकी इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए दोनों नाबालिगों को उकसाने के साथ ही हिंसक गतिविधियां संचालित करने की ट्रेनिंग दे रहे थे। कश्मीर को इस्लामिक स्टेट बनाने, अराजकता फैलाने और धार्मिक उन्माद बढ़ाने की जानकारी साझा की जाती थी। एटीएस ने दोनों के इंस्टाग्राम से यह तथ्य बरामद किए हैं।
पूछताछ में दोनों ने माना कि उन्हें धार्मिक उन्माद और कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने की दिशा में लगातार तैयार किया जा रहा था। उनसे मिले इनपुट के आधार पर अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। दोनों नाबालिग 12वीं कक्षा के छात्र बताए गए हैं। जांच में पता चला कि वे सांप्रदायिक भाषण सुनते थे और इसी कारण शिक्षकों ने उन्हें कई बार मोबाइल स्कूल लाने पर फटकार लगाई थी।
ISIS Module Chhattisgarh एटीएस की पहली एफआईआर
छत्तीसगढ़ में एटीएस का गठन 2017 में किया गया था। पहली बार एटीएस थाने में एफआईआर दर्ज कर दोनों नाबालिगों को गिरफ्तार किया गया। ( Raipur ATS Raid ) आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े होने के शक में उन्हें हिरासत में लेकर 36 घंटे तक पूछताछ की गई और मोबाइल डेटा का विश्लेषण किया गया। इस दौरान उनसे आतंकी मॉड्यूल से जुड़े पुख्ता सबूत मिले।
अराजकता और हिंसा फैलाने की योजना
जांच में सामने आया कि उन्हें धार्मिक कट्टरता के नाम पर बरगलाया जा रहा था। सोशल मीडिया पर बनाए गए खातों के माध्यम से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने, युवाओं को जोड़ने और हिंसक गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए जा रहे थे। इसके लिए आर्थिक मदद देने की पेशकश तक की गई थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिले इनपुट के आधार पर आईएसआईएस के पाकिस्तानी मॉड्यूल और इससे जुड़े लोगों को जांच के घेरे में लिया गया। गोपनीय जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
आर्थिक स्रोत की जांच
एटीएस दोनों नाबालिगों के आर्थिक स्रोतों की जांच कर रहा है। उनके घर से बरामद डिजिटल एविडेंस और सामग्री को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पूछताछ में पता चला कि ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित गोपनीय जानकारी दोनों को जुटाने कहा गया था। इसके अलावा आसपास के युवाओं को मॉड्यूल से जोड़कर हिंसक गतिविधियां बढ़ाने, अराजकता फैलाने और कश्मीर को इस्लामिक स्टेट बनाने के निर्देश भी दिए गए थे। आतंकी संगठन से जुड़े खातों से उन्हें लगातार निर्देश मिलते थे और दोनों उसी के आधार पर काम कर रहे थे।





