Commission Directive से बदला सुनवाई का रुख—कई प्रकरणों में तत्काल कार्रवाई की पहल
रायपुर, 19 नवंबर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग में आज हुई जनसुनवाई कई महत्वपूर्ण निर्णयों की वजह से विशेष रही। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अगुवाई में 349वीं राज्य स्तरीय और 168वीं रायपुर जिला जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें महिला उत्पीड़न से जुड़े संवेदनशील मामलों पर गंभीरता से विचार हुआ।
यह पूरी सुनवाई आयोग के सख्त निर्देश—Commission Directive के इर्द-गिर्द दिखाई दी।
कॉलेज में Workplace Harassment के आरोप—प्राचार्य को दो माह में रिपोर्ट देने के आदेश
Workplace Harassment का गंभीर मामला सामने आया
पहला प्रकरण नवीन महाविद्यालय नवागांव की महिला सहायक प्राध्यापिकाओं से जुड़ा रहा। आवेदिकाओं ने शिकायत की कि एक पुरुष प्राध्यापक द्वारा
- छात्र-छात्राओं के सामने अभद्र भाषा में बात करना,
- धमकाना,
- संख्या दर्ज करने में दबाव डालना,
- “जूते के नीचे रहो” जैसे अपमानजनक वाक्य कहना
जैसे गंभीर व्यवहार लगातार किए जा रहे थे।
एक आवेदिका ने बताया कि मेडिकल जरूरत के चलते छुट्टी की सूचना देने पर, उस प्राध्यापक ने सार्वजनिक रूप से इतना विवादित व्यवहार किया कि उसका बीपी लो हो गया और तनाव के कारण उसकी प्रेगनेंसी में बच्चे की हार्टबीट बंद हो गई, जिसके चलते अबॉर्शन हो गया।
यह मामला आयोग ने सीधे Workplace Harassment की श्रेणी में देखा।
प्राचार्य को जांच का आदेश
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद आयोग ने कॉलेज प्राचार्य को पत्र जारी करते हुए दो माह में पूरी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग का मानना है कि निष्पक्ष जांच से ही इस प्रकरण का Case Resolution संभव है।
ग्रेच्युइटी मामले में मैनेजमेंट पर सवाल—अनावेदक जवाब देने में असमर्थ
बकाया राशि को लेकर विवाद
दूसरे प्रकरण में आवेदिका ने स्वास्थ्य कारणों से नौकरी छोड़ने के बाद 6 लाख 64 हजार रुपये की ग्रेच्युइटी और बकाया राशि नहीं मिलने की शिकायत रखी।
अनावेदक शुरुआत में स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और बाद में इसे “मैनेजमेंट का मामला” बताते रहे। आयोग ने इस पर कड़ा रुख अपनाया।
1 माह में आपसी सहमति का निर्णय करने के निर्देश
दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को साथ बैठकर समाधान निकालने के लिए 1 माह की अवधि दी गई। इसके बाद उन्हें फिर आयोग के सामने उपस्थित होना होगा ताकि आगे का Case Resolution किया जा सके।
बच्चों के भरण-पोषण से इनकार—आयोग ने दी Legal Guidance
ढाई साल से टल रहा विवाद
तीसरे मामले में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक लगातार दो बच्चों के भरण-पोषण से बचते आ रहे हैं। डेराई गई समयावधि और लगातार बहानेबाज़ी को देखते हुए आयोग ने सख्त रुख अपनाया।
FIR और कोर्ट में दावा दाखिल करने की सलाह
आयोग ने आवेदिका को स्पष्ट Legal Guidance दी—
वह थाना में प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कर सकती हैं और भरण-पोषण के लिए न्यायालय में दावा प्रस्तुत कर सकती हैं। निर्देश के साथ यह प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।
दहेज प्रताड़ना के मामले में समझौता असफल—आयोग ने कराया नस्तीबद्ध
ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप
अगले प्रकरण में आवेदिका ने दहेज के लिए लगातार प्रताड़ना, मारपीट और मायके से पैसे लाने के दबाव की शिकायत की थी। पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच सहमति की कोशिश हुई थी, मगर आज अनावेदक ने किसी भी समझौते से इंकार कर दिया।
आयोग ने सुरक्षा के लिए निर्देश दिए
आयोग ने आवेदिका को परिवार की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के तहत थाना में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।
प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया।





