सीजी भास्कर, 29 नवंबर। रायपुर के आंबेडकर अस्पताल में 10 महीने पहले हुई नवजात चोरी की सनसनीखेज वारदात पर अदालत ने कठोर रुख अपनाते हुए आरोपी (Ambedkar Hospital Infant Theft) मां–बेटी को 10-10 साल की सजा सुनाई है। मौदहापारा थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले में आरोपित रानी साहू और उसकी बेटी पायल को दोषी माना गया है, जबकि मामले में शामिल युवक को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
अभियोजन के अनुसार, दोनों महिलाओं की पहचान अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज से हुई थी। 3 जनवरी को नवजात की मां नीता रात्रे प्रसव के लिए भर्ती थीं और उनकी सास भी साथ थी। आरोपी महिलाएं वार्ड में लगातार चक्कर लगाती रहीं, नीता और उनकी सास से घुलती-मिलती रहीं और सहानुभूति जताकर उनका विश्वास जीतती रहीं।
4 जनवरी को लंच के बाद जैसे ही नीता और उनकी सास हाथ धोने बाहर गईं, रानी और पायल ने मौका पाकर नवजात को उठा लिया और ट्रेन से बिलासपुर (Ambedkar Hospital Infant Theft) जाने की कोशिश में थीं।
मौदहापारा थाना और क्राइम ब्रांच की टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को लोकल ट्रेन से हिरासत में ले लिया और बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया।
जांच में सामने आया कि अपहरण पैसों की लालच में किया गया था। आरोपी रानी इससे पहले भी अपनी एक बेटी को प्रयागराज में 50 हजार रुपये में बेच चुकी थी। इसी तरह नवजात को भी किसी दंपत्ति को बेचने की योजना थी।
अपर सत्र न्यायाधीश बृजेश राय की अदालत ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोनों महिलाओं को 10-10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। पुलिस और प्रशासन (Ambedkar Hospital Infant Theft) ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रदेश में बाल अपहरण, अस्पताल सुरक्षा उल्लंघन और मानव तस्करी जैसे अपराधों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।


