सीजी भास्कर 30 नवंबर Fake Voter House Case : भोपाल के नरेला विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची को लेकर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। एक ही घर—मकान नंबर 70, पुष्पा नगर—पर 30 लोगों का निवास दिखाया गया, जिनमें से 29 नाम ऐसे बताए जा रहे हैं जो वास्तव में वहां रहते ही नहीं।
दावा किया गया है कि यह पता मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के कार्यालय का है, जहां केवल एक व्यक्ति रहता है।
दिग्विजय सिंह बोले—‘ये तो खुली हेराफेरी है’
राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह शनिवार को मौके पर पहुंचे और खुद मतदाता सूची की जाँच की। सूची देखकर उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी भारी गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी किसकी है?
उन्होंने कहा, “जब एक ही पते पर इतने लोग रहने दिखाए जा रहे हैं, तो ये भ्रम नहीं—सीधी हेराफेरी है।”
Fake Voter House Case : बीएलओ को बुलाया, फिर गिनकर करवाए नाम
भूतपूर्व मुख्यमंत्री ने मतदान केंद्र 189 पर बीएलओ प्रतिमा भीलवारे से मतदाता सूची मंगवाई।
उन्होंने कहा—“गिनकर बताइए, कितने नाम हैं?”
बीएलओ ने गिनना शुरू किया… 28 नाम गिने जा चुके थे, और सूची पर दिग्विजय सिंह ने इशारा करते हुए पूछा—क्या इतनी संख्या होने पर एआरओ की मौके पर जांच अनिवार्य नहीं होती?
बीएलओ ने इस पर अनभिज्ञता जताई।
कांग्रेस नेताओं का दावा—‘यह कार्यालय है, आवास नहीं’
मौके पर मौजूद स्थानीय कार्यकर्ताओं ने बताया कि मकान नंबर 70 किसी आवासीय उपयोग में नहीं है। यहाँ केवल शिक्षक संघ का छोटा सा कार्यालय चलता है, लेकिन सूची में दिखाए गए 29 व्यक्तियों में से एक भी व्यक्ति यहां नहीं मिलता।
Fake Voter House Case : Singh का आरोप—‘SIR का पूरा ढांचा ही संदिग्ध है’
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि जो प्रक्रिया SIR के नाम पर चलाई जा रही है, वह पूरी तरह धांधली से भरी है।
उन्होंने बीएलओ, सुपरवाइज़र और एआरओ से संपर्क की कोशिश की, लेकिन उनका कहना था कि किसी ने भी सीधे जवाब नहीं दिया।
उनका आरोप है कि अगर ऐसे वोट जोड़े गए हैं, तो इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ा तनाव, सवाल यह—जिम्मेदारी किसकी?
मतदाता सूची में इतनी बड़ी संख्या में गलत नाम दर्ज होने से चुनावी माहौल में तनाव बढ़ना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने वोटिंग प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
वहीं कई लोगों का मानना है कि यह सिर्फ एक उदाहरण है—पूरी लिस्ट में कितने और ऐसे नाम हो सकते हैं, इसका पता जांच में ही चलेगा।
आगे क्या? मामले की जांच की मांग और नई बहस
अब यह मामला प्रशासन और चुनाव प्राधिकरण तक पहुंच चुका है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हैं और चुनावी तैयारियाँ जारी हैं।
