MP Civil Supplies Debt Crisis : मध्यप्रदेश में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं–धान खरीदने वाले नागरिक आपूर्ति निगम की आर्थिक सेहत पिछले कुछ वर्षों में लगातार बिगड़ती चली गई है। स्थिति यह है कि निगम का कुल बकाया 62,944 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है—और सिर्फ ब्याज भरने में ही रोज़ करीब 14 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ रहा है।
राज्य के वित्तीय तंत्र पर यह अतिरिक्त दबाव अब चिंता का बड़ा कारण बन गया है।
केंद्र से भुगतान में देरी… और बढ़ता ब्याज
निगम के अधिकारियों के अनुसार, संकट की जड़ में सबसे बड़ा कारण है payment delay issue । केंद्र से समय पर खाद्यान्न भुगतान न मिलने से स्थिति हर महीने और खराब होती जा रही है। ब्याज की किश्तें समय पर चुकाने के लिए निगम को लगातार महंगा ऋण लेना पड़ रहा है—और यह चक्र धीरे-धीरे कर्ज को बेकाबू बना देता है।
MP Civil Supplies Debt Crisis : साल-दर-साल आंकड़े: कैसे बढ़ता गया घाटा
वर्षों के हिसाब से निगम का कर्ज कुछ इस तरह चढ़ा—
- मार्च 2021: 37,381 करोड़ रुपये
- मार्च 2022: 44,612 करोड़ रुपये
- मार्च 2023: 39,442 करोड़ रुपये
- मार्च 2024: 35,998 करोड़ रुपये
- मार्च 2025: 47,652 करोड़ रुपये
- 13 नवंबर 2025 तक: 62,944 करोड़ रुपये
इन आँकड़ों से साफ है कि कुछ वर्षों में घटने वाला बकाया अचानक तेज़ी से बढ़ा, जिससे राज्य का वित्तीय प्रबंधन असंतुलित हो गया।
गुणवत्ता वाली उपज को लेकर पेंच—FCI में अटकता माल
निगम के सामने एक और दिक्कत है quality dispute issue । कई बार किसानों के दबाव में ऐसी उपज भी खरीद ली जाती है, जिसे आगे एफसीआई स्वीकार नहीं करता।
इस स्थिति में खाद्यान्न सेंट्रल पूल में जाता ही नहीं… और भुगतान भी अटक जाता है।
जब तक केंद्र से पैसा नहीं मिलता, तब तक ब्याज की रकम सीधे निगम के सिर पर रहती है। यहाँ तक कि भुगतान मिलने के बाद भी कुल राशि का लगभग 10% हिस्सा अंतिम मिलान के लिए रोके रखा जाता है।
MP Civil Supplies Debt Crisis : राज्य की मांग: केंद्र जल्द जारी करे बकाया भुगतान
राज्य सरकार की ओर से केंद्र को यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जल्द भुगतान जारी करना बेहद जरूरी है, वरना रबी–खरीफ खरीद व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। साथ ही बढ़ते ब्याज का दबाव अब निगम को अपने संचालन खर्च तक प्रभावित करने लगा है, जो आने वाले महीनों में बड़ी चुनौती बन सकता है।





