सीजी भास्कर, 5 दिसंबर। सरकार ने आखिरकार वह कदम उठाने का संकेत (Government Bank Privatization) दे दिया है, जिसे लेकर चर्चा वर्षों से रुकी हुई थी। IDBI बैंक — जो कभी डूबते कर्ज, खराब बैलेंस शीट और अव्यवस्थित प्रबंधन का प्रतीक माना जाता था — अब उसी बैंक को निजी हाथों में देने की तैयारी लगभग पूरी है। लक्ष्य साफ़ है — सरकार इस हफ्ते या अगले हफ्ते तक बोली आमंत्रित कर सकती है, ताकि करीब 64,000 करोड़ रुपये की बड़ी राशि उठाई जा सके।
यह बिक्री सिर्फ वित्तीय लेनदेन नहीं, बल्कि लाइफ-इंश्योरेंस दिग्गज LIC और केंद्र सरकार — दोनों का एक बड़ा एग्ज़िट भी होगी। हिस्सेदारी कुल मिलाकर 60.72% तक ट्रांसफर (Government Bank Privatization) की जाएगी, जिसमें प्रबंधन का अधिकार भी निजी खरीदार के पास जाएगा। कई वैश्विक इंवेस्टर्स और भारतीय बैंक इस रेस में हैं, लेकिन असली बाज़ी उसी के नाम जाएगी जो कीमत के साथ भविष्य की रणनीति भी पेश कर सके।
दिलचस्प यह भी है कि IDBI Bank प्राइवेटाइजेशन उस दौर में हो रहा है जब बैंक की बैलेंस शीट साफ़ हुई है, बड़े NPA कम हुए हैं और लाभ में वापसी दर्ज (Government Bank Privatization) हो चुकी है। यानी बैंक अब बोझ नहीं — एक कमर्शियल अवसर है, जिसे निजी कंपनियाँ विस्तार और अधिग्रहण के जरिए बड़ा बना सकती हैं।
सरकार ने साफ़ किया है कि डील यदि तय समय पर पूरी होती है तो 2026 तक बैंक का स्वामित्व बदला हुआ दिख सकता है। यह भारतीय बैंकिंग ढांचे में सबसे बड़ा पुनर्गठन होगा — जिसे आने वाले वर्षों तक एक मिसाल के रूप में देखा जाएगा।


