सीजी भास्कर, 5 दिसम्बर। छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य में चर्चा में रहे छत्तीसगढ़िया (Amit Baghel Surrender News) क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल आज देवेन्द्र नगर थाने में आत्मसमर्पण कर सकते हैं। पुलिस ने इस संभावित सरेंडर को देखते हुए पहले ही सुरक्षा व्यवस्था टाइट कर दी है।
अंदेशा है कि समर्थकों की भीड़ जुट सकती है, यही वजह है कि थाने के साथ कोर्ट–परिसर तक में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। हालात किसी भी समय गर्म हो सकते हैं, और विभाग सुनिश्चित करना चाहता है कि माहौल काबू में रहे।
इस बीच, अमित बघेल की मां का निधन हो गया है। शव उनके गृह ग्राम पथरी ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं। संभावना है कि सरेंडर के तुरन्त बाद वह अंतिम संस्कार ((Amit Baghel Surrender News)) में शामिल होने के लिए अदालत में जमानत याचिका दायर कर सकें।
क्यों चर्चा में हैं अमित बघेल?—बयान बना विवाद, FIR से गिरफ्तारी तक का सफर
करीब दो महीने से बघेल फरार हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने के बाद आक्रोशित प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अग्रसेन महाराज और झूलेलाल सहित सिंधी समुदाय के देव स्वरूपों पर टिप्पणी की थी। इसके बाद सिंधी समाज और अग्रवाल समाज में विरोध तेज़ हुआ और कई जिलों में प्रदर्शन तक हुए।
यही बयान आगे बढ़ते-बढ़ते इतने विवाद में बदल गया कि देशभर के 12 राज्यों में बघेल पर FIR दर्ज हो गई—और गिरफ्तारी की तलवार लगातार सिर पर लटकती रही।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख दिखाया था
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में उनकी अग्रिम जमानत पर सुनवाई हुई और अदालत ने साफ तौर पर कहा—“अपनी जुबान संभालकर रखें। जहां केस दर्ज है, वहां जाकर कानून का सामना करें।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR को क्लब करने या राहत देने का प्रश्न ही नहीं उठता। आदेश (Amit Baghel Surrender News) के बाद गिरफ्तारी का रास्ता लगभग साफ हो गया था और अब, मां के निधन के बाद, सरेंडर की संभावना और तीव्र हो गई है।
कोर्ट परिसर में सतर्कता—कदम दर कदम बढ़ेगा एक्शन
देवेन्द्र नगर थाना और न्यायालय परिसर में बैरिकेडिंग, अतिरिक्त फोर्स और इंटेलिजेंस यूनिट की तैनाती की जानकारी सामने आई है। पुलिस रिमांड की प्रक्रिया तैयार रखे हुए है। जैसे ही सरेंडर की पुष्टि होगी, गिरफ्तारी तत्काल प्रभाव से हो सकती है।
वातावरण गंभीर है—एक तरफ एक मां की मृत्यु, दूसरी तरफ कानूनी दबाव और भीड़भाड़ का जोखिम। आज का दिन छत्तीसगढ़ की कानून-व्यवस्था और सामाजिक चर्चा दोनों पर निर्णायक असर डाल सकता है।





