सीजी भास्कर, 06 दिसंबर। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा छह महीने बाद प्रमुख नीतिगत दर में कटौती के ऐलान के कुछ ही घंटों के भीतर देश के दो बड़े सरकारी बैंक — बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया — ने रेपो से जुड़े कर्ज की ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की कमी (Repo Rate Cut) कर दी, जिससे उपभोक्ताओं को अब सस्ता लोन मिलने का रास्ता खुला है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत को अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक बढ़ी हुई टैरिफ दरों जैसे वैश्विक दबावों का सामना करना पड़ रहा है और आर्थिक मोर्चे पर राहत जरूरी थी। RBI ने मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट घटाकर 5.25% कर दिया है और बैंकिंग सिस्टम में 1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता वापस डालने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को संतुलित “गोल्डीलॉक्स” समर्थन देना है।
पीटीआई के आधार पर जारी सूचना के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RBLR) को 8.35% से घटाकर 8.10% कर दिया, जो शुक्रवार से लागू (Repo Rate Cut) हो चुकी है। दूसरी ओर, बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी अपनी बड़ौदा रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (BRLLR) को 8.15% से घटाकर 7.90% कर दिया है, जिसकी प्रभावी तिथि 6 दिसंबर होगी।
इससे पहले इंडियन बैंक ने भी अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 बेसिस प्वाइंट की कमी की थी, जो 3 दिसंबर से प्रभावी है। यानी बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज घटाने की श्रंखला शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में अन्य PSU बैंक भी ग्राहकों को कम दर पर लोन उपलब्ध करा सकते हैं।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया और अपनी न्यूट्रल स्टांस बरकरार रखते हुए संकेत दिए कि आवश्यकता (Repo Rate Cut) पड़ने पर भविष्य में और कटौती की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
रेपो रेट में गिरावट से उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी, निवेश वातावरण में सुधार और बाजार में नकदी उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम GST सुधार, श्रम नियमन में लचीलापन और वित्तीय ढांचे के सरलीकरण की दिशा में सरकार के विज़न को भी तेज़ी देगा।
इस निर्णय के व्यापक प्रभाव में घरेलू कर्ज सस्ता होना, ऑटो-होम लोन की EMI घटने की संभावना और MSME सेक्टर को पूंजी उपलब्धता (Repo Rate Cut) में राहत शामिल है।
अमेरिकी टैरिफ दबाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता के बीच यह ब्याज कटौती भारत की अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक प्रोत्साहन बन सकती है। इससे उद्योग और उपभोग दोनों को गति मिल सकती है, जिससे आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियां तेजी से पुनर्जीवित होने की उम्मीद बनती है।





