वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में आज एक Vande Mataram anniversary debate आयोजित की जा रही है, जिसकी अवधि 10 घंटे रखी गई है। लोकसभा की कार्यवाही का आरंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, वहीं उच्च सदन में चर्चा का आगाज़ गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन से होगा। चर्चा की व्यापकता को देखते हुए दोनों सदनों में राजनीतिक तापमान बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
ऐतिहासिक गीत और उसका महत्व
“वंदे मातरम”, जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने रचा था, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक भावनात्मक और क्रांतिकारी स्वर रहा है। 1875 में पहली बार प्रकाशित हुआ यह गीत आगे चलकर देशभक्ति का सबसे सशक्त प्रतीक बना। सरकार द्वारा इसकी 150वीं वर्षगांठ पर जारी स्मारक सिक्का और डाक टिकट ने एक बार फिर इसकी Vande Mataram legacy पर जनचर्चा को गति दी है।
Vande Mataram anniversary debate : लोकसभा में नेताओं की लिस्ट और आज की कार्यवाही
लोकसभा में यह बहस सुबह 11 बजे शुरू होगी। प्रधानमंत्री के प्रारंभिक संबोधन के बाद कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा अपनी दलीलें रखेंगी। उनके अलावा दीपेंद्र सिंह हुड्डा, गौरव गोगोई, ज्योत्सना महंत सहित कई सांसद भी इस चर्चा में शामिल होंगे। समापन का दायित्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा गया है, जो पूरे विमर्श को समेटते हुए अंतिम टिप्पणियां रखेंगे।
राज्यसभा में विपक्ष और सरकार की तैयारियां
राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत गृह मंत्री करेंगे और उसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे अपनी बात रखेंगे। सदन की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी और सर्वदलीय बैठक में पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि यह national song debate सिर्फ राजनीति तक सीमित न रहकर सांस्कृतिक और ऐतिहासिक आयामों को भी उजागर करेगी।
आजादी के आंदोलन में गीत की भूमिका पर फिर नया फोकस
150 वर्षों की इस यात्रा ने वंदे मातरम को केवल एक राष्ट्रीय गीत नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, त्याग और स्वतंत्रता के स्वप्न का प्रतीक बना दिया है। संसद में होने वाली यह विस्तृत बहस इस गीत की उसी विरासत को नए संदर्भ में समझने और साझा करने का अवसर प्रदान करेगी। कई सांसदों का मानना है कि यह चर्चा आने वाले वर्षों के लिए एक सांस्कृतिक दस्तावेज के रूप में देखी जाएगी।




