सीजी भास्कर 12 दिसम्बर देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना को लेकर आज का दिन अहम माना जा रहा है. MGNREGA name change को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इसे एक नए नाम—“पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना”—के साथ नई पहचान देने का फैसला ले सकती है. यह बदलाव लंबे समय से चल रही उस बहस को फिर तेज कर सकता है कि योजनाओं को उनके मूल नामों से कितनी दूरी तक अलग किया जा सकता है.
2005 में शुरुआत, दो बार बदला नाम – अब तीसरे बदलाव की तैयारी
मनरेगा की शुरुआत 2005 में हुई थी, जब इसे National Rural Employment Guarantee Act के नाम से लागू किया गया था. कुछ वर्षों बाद इसमें महात्मा गांधी का नाम जोड़कर इसे MGNREGA किया गया. अब, अगर आज की बैठक में प्रस्ताव पारित होता है, तो यह तीसरा और सबसे बड़ा बदलाव होगा. योजना से जुड़े विशेषज्ञ बता रहे हैं कि नया नाम ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गांधी विचारों की भूमिका को रेखांकित करने की कोशिश माना जा सकता है.
देशभर में 100 दिन रोजगार की रीढ़ — 15 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े
मनरेगा उन चुनिंदा कार्यक्रमों में है जो ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित करते हैं. ग्रामीण आजीविका को सहारा देने वाली इस स्कीम में फिलहाल 15.4 करोड़ से ज्यादा लोग एक्टिव भागीदारी निभा रहे हैं. केंद्र सरकार के मुताबिक, यह कार्यक्रम सिर्फ मजदूरों के लिए रोजगार नहीं, बल्कि स्थानीय विकास कार्यों का भी आधार बन चुका है. इसी वजह से इसके नाम में बदलाव को लेकर हलचल और भी बढ़ी है.
शांति बिल 2025 पर भी नजर – न्यूक्लियर सेक्टर में नई नीति की तैयारी
आज की बैठक सिर्फ मनरेगा तक सीमित नहीं है. चर्चाओं में यह भी शामिल है कि सरकार न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर के लिए प्रस्तावित “Peace Bill 2025 ” पर भी मुहर लगा सकती है. इसका उद्देश्य—निवेश, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी सुधारों के लिए एक नए रोडमैप को तैयार करना है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बिल भारत की एनर्जी पॉलिसी को आने वाले वर्षों के लिए नई दिशा दे सकता है.
शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम? विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल पर भी फैसला संभव
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की मेज पर एक और बड़ा प्रस्ताव “Developed India Education Act 2025” भी रखा गया है. इस बिल का मकसद—राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था को विकसित भारत के विज़न से जोड़ते हुए ज्यादा व्यवहारिक और टेक-ड्रिवन बनाना है. अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो स्कूल से उच्च शिक्षा तक बड़ी नीतिगत फेरबदल देखने को मिल सकते हैं.
आज का दिन फैसला लाएगा – लेकिन असर लंबे समय का
मनरेगा हो या न्यूक्लियर नीति, या फिर शिक्षा सुधार—कैबिनेट की आज की बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण है. सबसे ज्यादा नज़र उस फैसले पर है, जो MGNREGA name change को लेकर सामने आ सकता है. यदि नया नाम लागू होता है, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर बदलाव होगा, बल्कि ग्रामीण भारत में काम करने वाले करोड़ों परिवारों के लिए भी नई शुरुआत जैसा महसूस होगा.




