सीजी भास्कर, 13 दिसंबर | Chhattisgarh Nursery School Rules : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नर्सरी और प्री-नर्सरी स्कूलों को लेकर राज्य की तैयारियों पर कड़ा रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि 19 नवंबर 2025 को जारी निर्देश महज़ औपचारिकता बनकर रह गए हैं। सजा और जवाबदेही के बिना बनी गाइडलाइन, बच्चों के हितों की रक्षा नहीं कर सकती—यह Chhattisgarh Nursery School Rules की बुनियादी कसौटी पर खरा नहीं उतरती।
नियम पहले, गाइडलाइन बाद में—कोर्ट का अनुशासन
बेंच ने सरकार से कहा कि दिशा-निर्देशों से पहले ठोस नियम बनें। जिन संस्थानों पर निःशुल्क शिक्षा का दायित्व है, उनके लिए कठोर, पारदर्शी और लागू होने योग्य ढांचा जरूरी है, ताकि उल्लंघन पर सीधी कार्रवाई हो सके। अदालत ने रेखांकित किया कि बिना दंड-प्रावधान के नियम, व्यवहार में असर नहीं डालते—यही Chhattisgarh Nursery School Rules का केंद्रीय सवाल है।
जनहित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई—मुद्दा व्यापक
यह टिप्पणी उस समय आई जब भिलाई निवासी सी. भगवंत राव सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की अर्जियों पर एक साथ सुनवाई हुई। याचिकाओं में आरटीई अनुपालन, नर्सरी स्कूल खोलने के लिए स्पष्ट नियमों की कमी और निगरानी तंत्र की कमजोरियों को उठाया गया है। अदालत ने संकेत दिया कि समस्या एक-दो शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि राज्यव्यापी है.
शिकायतों का अंबार, निपटारे की रफ्तार सुस्त
शिक्षा सचिव द्वारा पेश शपथ-पत्र में बताया गया कि सत्र 2025–26 में 976 शिकायतें मिलीं, जिनमें से केवल 167 का समाधान हुआ। 809 मामले लंबित हैं। यह आंकड़ा अदालत के सामने आया तो बेंच ने इसे चिंताजनक बताया और कहा कि शिकायत-निवारण की मौजूदा प्रक्रिया भरोसा नहीं जगाती.
जिलावार तस्वीर—असंतुलन उजागर
याचिकाकर्ताओं ने जिलावार तथ्य रखे—दुर्ग में 183 में से 1, बिलासपुर में 99 में से 1 और रायपुर में 199 में से 42 शिकायतों का निपटारा। बेंच ने कहा कि यह असमानता बताती है कि सिस्टम में मानक प्रक्रियाओं का अभाव है, जो Chhattisgarh Nursery School Rules को कमजोर करता है।
बच्चों से जुड़ा मामला—देरी अस्वीकार्य
अदालत ने दो टूक कहा कि नर्सरी स्तर के बच्चों से जुड़ी शिकायतें लंबित रखना उचित नहीं। अभिभावकों की समस्याओं का त्वरित समाधान होना चाहिए। सरकार को निर्देश दिए गए कि सभी लंबित मामलों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
सरकार का आश्वासन—पुनरीक्षण और कानूनी मजबूती
महाधिवक्ता ने भरोसा दिलाया कि शिक्षा विभाग गाइडलाइन का पुनरीक्षण करेगा और आवश्यक संशोधनों के साथ उन्हें कानूनी आधार देगा। हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ एक ठोस नीति सामने आएगी—ताकि Chhattisgarh Nursery School Rules व्यवहार में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।





