सीजी भास्कर, 17 दिसंबर। डिजिटलीकरण ने जहां आम जनता के लिए कई सुविधाएं आसान की हैं, वहीं इसके दुरुपयोग (AI Edited E-Ticket Scam) के मामले भी तेजी से सामने आने लगे हैं। हाल के दिनों में ट्रेनों में एक ही सीट पर दो से तीन यात्रियों द्वारा दावा किए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जांच में सामने आया है कि इसका प्रमुख कारण एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से तैयार किए जा रहे फर्जी ई-टिकट हैं।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल में एआई के दुरुपयोग से बनाए जा रहे फर्जी ई-टिकट का एक गंभीर मामला सामने आया है। वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, नागपुर मंडल दिलीप सिंह के निर्देश पर मंडल स्तर पर विशेष सतर्कता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 12 दिसंबर 2025 को गाड़ी संख्या 12833 में नागपुर–गोंदिया सेक्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात टिकट जांच कर्मचारी इंद्रजीत द्वारा जांच के दौरान दो यात्रियों को एक ही सीट पर दावा करते हुए पाया गया।
संदेह होने पर दोनों यात्रियों के ई-टिकटों (AI Edited E-Ticket Scam) की एचएचटी उपकरण से जांच की गई। जांच में एक ई-टिकट वैध पाया गया, जबकि दूसरा ई-टिकट निष्क्रिय (फ्लश्ड) पीएनआर के आधार पर तैयार किया गया फर्जी ई-टिकट निकला।
(AI Edited E-Ticket Scam) मोबाइल नंबर निकला बंद
पूछताछ के दौरान पता चला कि फर्जी ई-टिकट एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराया गया था। संपर्क करने पर उसका मोबाइल नंबर बंद मिला। आगे की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फ्लश्ड पीएनआर का उपयोग कर ई-टिकट की पीडीएफ फाइल को डिजिटल रूप से एडिट किया गया था और एआई टूल्स की सहायता से नकली टिकट तैयार किया गया।
वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक दिलीप सिंह ने मंडल के सभी टिकट जांच कर्मचारियों (टीटीई/टीसी) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी ई-टिकट और एम-टिकट का एचएचटी उपकरण से अनिवार्य सत्यापन किया जाए। किसी भी संदिग्ध, एडिटेड या संशोधित डिजिटल टिकट को तत्काल फर्जी मानते हुए नियमानुसार कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि फर्जी टिकट मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और एआई आधारित धोखाधड़ी पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी।





