सीजी भास्कर, 18 दिसंबर। सर्दियों के आते ही घने कोहरे का असर दिखने लगता है और देशभर में सड़क दुर्घटनाओं (Transport Department Decision) का सिलसिला भी तेज हो जाता है। कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम हो जाती है, जिससे हादसों की घटनाएं बढ़ जाती हैं। बीते कुछ दिनों में घने कोहरे की वजह से कई भीषण एक्सीडेंट हुए, जिनमें दर्जनों लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए। ऐसी स्थिति में सख्त नियमों की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
हालिया घटनाओं के बाद परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के सही पालन से बड़ी दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। इनमें 50 मीटर से कम दिखाई देने पर बस संचालन पर रोक से लेकर फॉग लाइट और रिफ्लेक्टर के अनिवार्य इस्तेमाल जैसे निर्देश शामिल हैं।
बस चलाने पर रोक
एक्सप्रेसवे और हाईवे पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन विभाग ने साफ निर्देश दिया है कि 50 मीटर से कम दृश्यता होने पर बसों को आगे यात्रा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसी स्थिति में बसों को टोल प्लाजा, जन सुविधा केंद्र, विश्राम स्थल या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रोका जाएगा।
इसी के साथ अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षित स्थानों की पहचान करने को कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर बिना समय गंवाए बसों को रोका जा सके। यह फैसला (Transport Department Decision) सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है।
फॉग लाइट-रिफ्लेक्टर का उपयोग जरूरी
बस चालकों को यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे फॉग लाइट, रिफ्लेक्टर, इंडिकेटर सहित सभी जरूरी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग अनिवार्य रूप से करें। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बसों में फॉग लाइट नहीं है या रिफ्लेक्टर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, उन्हें सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बसों के टायर, ब्रेक और हेडलाइट जैसी जरूरी तकनीकी जांच भी अनिवार्य कर दी गई है। इसके साथ ही तेज रफ्तार से बचने के निर्देश भी दिए गए हैं। इन नियमों (Transport Department Decision) का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मौसम पर बनाए रखें नजर
संबंधित अधिकारियों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने कहा है कि स्थानीय प्रशासन, मौसम विभाग और ट्रैफिक पुलिस आपसी तालमेल बनाए रखें, ताकि मौसम से जुड़ी जानकारी समय पर साझा की जा सके। एआरटीओ और डिपो प्रबंधकों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे बदलते मौसम के अनुसार तुरंत निर्णय लिया जा सके।


