सीजी भास्कर, 16 सितंबर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) (NHM Employees Protest) के संविदा कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। 29वें दिन सभी 380 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इच्छामृत्यु की मांग उठाई। नियमितीकरण और वेतन वृद्धि समेत कई मुद्दों को लेकर उनकी आवाज और तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि कई दौर की वार्ता के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। उल्टा अब उन्हें बर्खास्तगी की चेतावनी दी जा रही है। आंदोलन (NHM Employees Protest) धीरे-धीरे और उग्र होता जा रहा है।
18 अगस्त से एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस वजह से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल (NHM Employees Protest) तक सेवाएं चरमरा गई हैं। कई विभाग बंद पड़े हैं और मरीजों को इलाज न मिलने से जान का खतरा बढ़ गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार सुनने की बजाय दमनकारी नीति अपनाकर आवाज दबा रही है। इस बीच एनएचएम कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर जल सत्याग्रह, खून से पत्र लिखने जैसे अनोखे तरीकों से भी प्रदर्शन कर चुके हैं।
सरकार का कहना है कि वह पांच मांगें पहले ही मान चुकी है, लेकिन कर्मचारी लिखित आदेश (NHM Employees Protest) चाहते हैं। खासतौर पर लंबित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि को लेकर विवाद बरकरार है। सोमवार को बड़ी संख्या में कर्मचारी धरना स्थल पर अपने बच्चों के साथ पहुंचे और राज्यपाल को इच्छामृत्यु की मांग सौंपी। संघ के नेताओं का कहना है कि 25 से अधिक कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया है और बाकी को चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं कि हड़ताल समाप्त न करने पर उन्हें भी बर्खास्त कर दिया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी ने बताया कि सभी 33 जिलों से आए कर्मचारियों ने सामूहिक हस्ताक्षर करके इच्छा मृत्यु का आवेदन तैयार किया है। इसे राज्यपाल को भेजा जाएगा। उनका कहना है कि जब तक लिखित आदेश में मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल (NHM Employees Protest) जारी रहेगी और आगे और भी उग्र आंदोलन की तैयारी की जाएगी। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि अब पीछे हटने का सवाल नहीं है।
इधर सरकार का दावा है कि पांच मांगें मान ली गई हैं, लेकिन कर्मचारी उस पर आधिकारिक आदेश (NHM Employees Protest) चाहते हैं। कर्मचारियों के अनुसार, बार-बार कमेटी बनाकर काम अटकाया जा रहा है, जिससे वे निराश हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन (NHM Employees Protest) केवल उनकी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती के लिए भी है।




