सीजी भास्कर, 22 दिसंबर। बिहार की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) के तेवर रविवार को गया में अचानक बेहद आक्रामक नजर आए। खुले मंच से उन्होंने सीधे एनडीए को चेतावनी देते हुए राज्यसभा की एक सीट की मांग की है। मांझी ने कहा कि अगर एनडीए ने उनकी बात नहीं सुनी तो वह गठबंधन से अलग होने में देर नहीं लगाएंगे। उनका बयान बिहार की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने कहा कि एनडीए में रहते हुए उनकी पार्टी को लगातार कम आंका गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सहयोगियों ने दो-दो बार उनके साथ बेईमानी की। मांझी ने साफ कहा— “अगर इतिहास दोहराया गया, तो हम भी अपना रास्ता अलग कर लेंगे।” राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह सीधे-सीधे एनडीए के लिए चेतावनी है।
राज्यसभा सीट की मांग पर उन्होंने दलित और महादलित समाज के प्रतिनिधित्व का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उनका कहना है कि एनडीए सरकार बनाने और उसे मजबूत करने में इस वर्ग की बड़ी भूमिका रही है, इसलिए सत्ता में हिस्सा भी उसी अनुपात में मिलना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) दलित समाज की आवाज हैं और इस आवाज की अनदेखी एनडीए को भारी पड़ सकती है।
इतना ही नहीं, मंच से जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने सांसद निधि को लेकर चौंकाने वाला दावा भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को मिलने वाले पांच करोड़ रुपये के फंड पर 10% कमीशन का खेल चलता है। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, पर व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आगामी राज्यसभा चुनाव में एनडीए के भीतर सीटों को लेकर मतभेद पहले से मौजूद हैं। इस बीच मांझी के बयान ने गठबंधन की सिरदर्दी बढ़ा दी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगर मामले को जल्द सुलझाया नहीं गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) पहले भी एनडीए से नाराजगी दिखाते रहे हैं, पर इस बार चेतावनी और मांग दोनों खुलकर सामने आई हैं।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में एनडीए नेतृत्व को मांझी को मनाने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। वरना बिहार की राजनीति में नए सियासी समीकरण बनते देर नहीं लगेगी। कुल मिलाकर, राज्यसभा सीट को लेकर उठी यह राजनीतिक हलचल आने वाले समय में पूरे प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।




