सीजी भास्कर, 24 दिसंबर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने की दिशा में राज्य सरकार (Online Token System) की पहल अब जमीन पर साफ नजर आने लगी है। ऑनलाइन टोकन व्यवस्था ने किसानों को न केवल राहत दी है, बल्कि उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को भी काफी हद तक कम किया है। धमतरी जिले के ग्राम पोटियाडीह के किसान तोरण पटेल इसकी जीवंत मिसाल बनकर सामने आए हैं।
धमतरी जिले के पोटियाडीह गांव में इस खरीफ सीजन हरियाली सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों के जीवन में भी समृद्धि लेकर आई है। करीब 8 एकड़ कृषि भूमि के मालिक तोरण पटेल इस वर्ष 79 क्विंटल धान लेकर उपार्जन केंद्र पहुंचे। उनका कहना है कि शासन की ऑनलाइन टोकन प्रणाली ने धान विक्रय को बेहद आसान और व्यवस्थित बना दिया है।
तोरण पटेल बताते हैं कि समय पर टोकन मिलने से अब न तो लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ता है और न ही अनिश्चितता की चिंता रहती है। पहले जहां पूरा दिन उपार्जन केंद्र (Online Token System) में निकल जाता था, अब तय समय पर धान बेचकर वे अपने खेती के अन्य कार्य भी सुचारू रूप से कर पा रहे हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि खेती का काम भी प्रभावित नहीं हो रहा।
पिछले वर्ष तोरण पटेल ने 168 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा था। समय पर भुगतान मिलने से उन्होंने ट्रैक्टर खरीदने का सपना पूरा किया, जिससे खेती की लागत कम हुई और कार्यक्षमता में भी बढ़ोतरी हुई। सहकारी समिति के माध्यम से खाद और बीज की समय पर उपलब्धता ने फसल की तैयारी को और आसान बना दिया।
दसवीं तक शिक्षित तोरण पटेल मानते हैं कि आज की खेती सिर्फ मेहनत पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही योजना, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग का संतुलन जरूरी है। उपार्जन केंद्रों में पेयजल, छाया, तौल व्यवस्था, त्वरित भुगतान और मौके पर मार्गदर्शन जैसी सुविधाओं ने किसानों का भरोसा और मजबूत किया है।
तोरण पटेल ने इन व्यवस्थाओं के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों ने किसानों (Online Token System) को आत्मविश्वास दिया है और खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने में मदद की है।
यह कहानी सिर्फ पोटियाडीह गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए प्रेरणा है। ऑनलाइन टोकन जैसी पहलें यह साबित कर रही हैं कि जब नीतियां किसान-हित में हों और व्यवस्थाएं मजबूत हों, तो खेती केवल आजीविका नहीं, बल्कि समृद्ध भविष्य की राह बन जाती है।


