सीजी भास्कर, 10 मई : छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) के परिवारों (Gariaband Samadhan Shivir) के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘पीएम जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान’ (PM-JANMAN) को पूरी गति से क्रियान्वित किया जा रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष अभियान के अंतर्गत अब तक पूरे प्रदेश में सर्वेक्षण के पश्चात 33 हजार से भी अधिक पक्के आवासों की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। शासन की तत्परता का ही परिणाम है कि इनमें से लगभग 21 हजार आवासों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण भी किया जा चुका है, जिससे हजारों आदिवासी परिवारों को अपना पक्का घर नसीब हुआ है।
राज्य सरकार उन परिवारों (Gariaband Samadhan Shivir) के प्रति भी संवेदनशील है जो तकनीकी कारणों या पलायन की वजह से पिछले सर्वे में शामिल होने से वंचित रह गए थे। ऐसे छूटे हुए पात्र हितग्राहियों के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने भारत सरकार से विशेष चर्चा कर पुनः सर्वेक्षण की अनुमति प्राप्त कर ली है। वर्तमान में प्रदेश भर में इन छूटे हुए परिवारों का सर्वे कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जिसके अगले एक से दो दिनों के भीतर संपन्न होने की पूरी संभावना है। जैसे ही यह सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी होगी, पात्र पाए गए सभी परिवारों को बिना किसी विलंब के आवास की स्वीकृति दे दी जाएगी।
वायरल वीडियो पर बोले Gariaband Samadhan Shivir
इसी क्रम में, हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो का संदर्भ देते हुए गरियाबंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) प्रखर चंद्राकर ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि समाधान शिविर के दौरान एक विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार (Gariaband Samadhan Shivir) का सदस्य अपना आवेदन लेकर उपस्थित हुआ था।
जांच में पाया गया कि उक्त परिवार पूर्व में छत्तीसगढ़ के बजाय उड़ीसा राज्य में निवास कर रहा था। इसी देशांतरण के कारण वर्ष 2011 और वर्ष 2018 में किए गए आधिकारिक आवास सर्वेक्षणों में इस परिवार का नाम दर्ज नहीं हो सका था। इतना ही नहीं, वर्ष 2024 में राज्य शासन द्वारा कराए गए नवीन सर्वे के समय भी यह परिवार ग्राम में उपस्थित नहीं था।
सीईओ ने आगे जानकारी दी कि कुछ ही दिन पहले उड़ीसा से वापसी के बाद, अब पीएम जनमन योजना के तहत उस परिवार का सर्वेक्षण कार्य संपन्न कर लिया गया है और उन्हें जल्द ही आवास की सौगात दी जाएगी। जिले के विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों और बसाहटों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को लाभान्वित करने के लिए प्रशासन बार-बार सर्वे आयोजित कर रहा है। जिन परिवारों की सूची तैयार हो चुकी है, उन्हें केंद्र सरकार से अंतिम मोहर लगते ही लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
प्रशासन की संवेदनशीलता का उदाहरण तब देखने को मिला जब उड़ीसा प्रवास के कारण उक्त परिवार (Gariaband Samadhan Shivir) के पास राशन कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड जैसे अनिवार्य दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे। अधिकारियों ने त्वरित निर्णय लेते हुए समाधान शिविर में ही मौके पर उनका राशन कार्ड और जॉब कार्ड तैयार करवाया। साथ ही, आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी तत्काल प्रारंभ कर दी गई है। जिला प्रशासन ने हितग्राही को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके हक के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


