सीजी भास्कर, 25 दिसंबर। जिले में शिक्षक युक्तियुक्तकरण को छह माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आदेश का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों पर अब शिक्षा विभाग (Teacher Rationalization Chhattisgarh) ने सख्त रुख अपना लिया है। नए स्कूलों में ज्वाइनिंग नहीं देने वाले 11 शिक्षकों की पहचान कर सूची तैयार की जा चुकी है और इनके खिलाफ बर्खास्तगी तक की कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, इन शिक्षकों के अभ्यावेदन पहले ही अमान्य घोषित किए जा चुके हैं, इसके बावजूद उन्होंने अब तक अपने नवीन पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इस स्थिति के कारण संबंधित विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है, जिसे विभाग ने गंभीर अनुशासनहीनता माना है।
छह माह पहले पूरी हुई थी युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया
शासन के निर्देश पर जून माह में जिले में शिक्षक युक्तियुक्तकरण (Teacher Rationalization Chhattisgarh) की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके अंतर्गत शहरी और आसपास के स्कूलों में आवश्यकता से अधिक पदस्थ शिक्षकों को शिक्षकविहीन एवं एकल शिक्षकीय स्कूलों में पदस्थ किया गया। जिले में लगभग साढ़े सात सौ शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया था।
इस प्रक्रिया के विरोध में कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें से कुछ को अंतरिम राहत मिली, जबकि अन्य शिक्षकों ने जिला एवं संभाग स्तरीय समितियों के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किए। जांच और सुनवाई के बाद मिडिल स्कूल के 11 शिक्षकों को किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिली और उनके आवेदन निरस्त कर दिए गए।
वेतन रोका गया, फिर भी आदेश की अवहेलना
अभ्यावेदन निरस्त होने के बाद भी इन 11 शिक्षकों ने छह माह बीत जाने के बावजूद नए स्कूलों में ज्वाइनिंग नहीं दी। शासन के निर्देश पर इन शिक्षकों का वेतन पहले ही रोका जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई जा रही है। शिक्षा विभाग (Teacher Rationalization Chhattisgarh) का मानना है कि यह न केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों का भी हनन है।
जांच दल गठित, रिपोर्ट के बाद होगी कड़ी कार्रवाई
मामले को गंभीर मानते हुए संयुक्त संचालक शिक्षा द्वारा जांच दल का गठन किया गया है। जांच की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। दोनों अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ज्वाइनिंग नहीं देने वाले शिक्षकों के विरुद्ध जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इसमें शासन को बर्खास्तगी की अनुशंसा भेजने से लेकर सेवा से पृथक करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
शिक्षकों में बढ़ा तनाव
विभागीय सख्ती और संभावित कार्रवाई की खबरों के बाद ज्वाइनिंग नहीं देने वाले शिक्षकों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी आदेशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और विद्यार्थियों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।





