सीजी भास्कर, 25 दिसंबर | Bhilai Retired Officer Online Fraud: भिलाई स्टील प्लांट से सेवानिवृत्त एक अधिकारी की जीवनभर की जमा पूंजी साइबर ठगों के झांसे में आकर पलभर में हाथ से निकल गई। दुर्ग जिले के रिसाली क्षेत्र में रहने वाले रिटायर्ड अधिकारी से ऑनलाइन निवेश के नाम पर करीब 37 लाख 50 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर डिजिटल निवेश की सच्चाई उजागर कर दी है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ भरोसे का खेल
पीड़ित निरंजन प्रसाद ने बताया कि फरवरी 2024 में फेसबुक पर उन्हें एक ऐसा विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें बैंक से कहीं अधिक मुनाफा देने का दावा किया जा रहा था। सेवानिवृत्ति के बाद मिली राशि को सुरक्षित निवेश में लगाने की सोच के चलते उन्होंने विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। यहीं से ठगी की कहानी की शुरुआत हुई।
लालच में मजबूत हुआ भरोसा
फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने खुद को निवेश सलाहकार बताते हुए हर महीने 4 प्रतिशत रिटर्न का भरोसा दिलाया। शुरुआत में कुछ महीनों तक लाभांश की रकम उनके खाते में आती रही, जिससे उन्हें योजना पर पूरा विश्वास हो गया। यही भरोसा धीरे-धीरे उनके लिए सबसे बड़ा नुकसान बन गया।
अलग-अलग शहरों में भेजी गई रकम
ठगों के निर्देश पर निरंजन प्रसाद ने अलग-अलग चरणों में पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु सहित कई शहरों में स्थित कंपनियों के नाम पर कुल 37.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजते समय किसी तरह का संदेह नहीं हुआ, क्योंकि शुरुआती रिटर्न नियमित रूप से मिल रहा था।
चार महीने बाद टूटा भ्रम
करीब चार महीने बाद अचानक लाभांश आना बंद हो गया। जब निरंजन प्रसाद ने संपर्क करने की कोशिश की, तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले। तब जाकर उन्हें अहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने नेवई थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
साइबर सेल को सौंपी गई जांच
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अपराध दर्ज किया और जांच साइबर सेल को सौंप दी है। बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल लिंक के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि यह मामला उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो अधिक मुनाफे के लालच में बिना जांच-पड़ताल निवेश कर देते हैं।
ज्यादा रिटर्न का वादा ही सबसे बड़ा खतरा
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी निवेश योजना यदि बैंक से कई गुना अधिक रिटर्न का दावा करती है, तो वह अपने आप में संदेहास्पद होती है। ऐसे मामलों में निवेश से पहले वैधानिक पंजीकरण, कंपनी की साख और आधिकारिक दस्तावेजों की जांच बेहद जरूरी है।





