सीजी भास्कर, 25 दिसंबर। कंधमाल–गंजाम की दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों में चला संयुक्त सुरक्षा अभियान केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि नक्सलवाद के विरुद्ध राज्य और राष्ट्र की स्पष्ट मंशा का सार्वजनिक एलान (Anti Naxal Operation) बनकर सामने आया। इस कार्रवाई में CPI (Maoist) के शीर्ष रणनीतिकार गणेश उइके के न्यूट्रलाइजेशन को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सली नेटवर्क की “रीढ़ पर निर्णायक प्रहार” करार दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता बताती है कि हिंसा के सहारे चलने वाले संगठनों के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है। सीमावर्ती इलाकों में लंबे समय से सक्रिय नेतृत्व के हटने से नक्सली तंत्र की योजना, सप्लाई लाइन और मनोबल—तीनों पर सीधा असर पड़ेगा। उनका स्पष्ट संदेश था कि सुरक्षा एजेंसियां अब प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि लक्ष्य-आधारित और परिणाम-केंद्रित रणनीति पर काम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आंतरिक सुरक्षा को लेकर नीतियां (Anti Naxal Operation) स्पष्ट हैं—हिंसा के लिए शून्य सहनशीलता और विकास के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता।
सुरक्षा बलों के साहस और पेशेवर दक्षता की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जवानों की सूझबूझ, समन्वय और जमीनी जानकारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि जटिल भौगोलिक परिस्थितियों में भी निर्णायक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने दो टूक कहा—“हिंसा का रास्ता छोड़िए, मुख्यधारा से जुड़िए; अन्यथा कानून अपना कार्य करेगा।”
सरकार की रणनीति केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। नक्सल प्रभावित अंचलों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार तेज़ी से किया जा रहा है, ताकि विकास का भरोसा जमीन पर दिखे। साथ ही, भटके युवाओं के पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और सम्मानजनक आजीविका के अवसर देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटाने पर जोर है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनता का सहयोग, सुरक्षा बलों की दृढ़ता और नीतिगत स्पष्टता—इन तीन स्तंभों के सहारे नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प शीघ्र साकार होगा। यह कार्रवाई उसी दिशा में एक ठोस, निर्णायक और दूरगामी कदम है।


