सीजी भास्कर, 27 दिसंबर। बस्तर जिले में औद्योगिक विकास को पर्यावरण-अनुकूल दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल सामने आई है। शुक्रवार को जगदलपुर स्थित कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में राइजिंग एंड एक्सीलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस योजना के अंतर्गत आयोजित जागरूकता कार्यशाला ने बस्तर के उद्योगों को ग्रीन पैकेजिंग (Green Packaging Initiative) की ओर अग्रसर करने का मजबूत संदेश दिया। इस कार्यशाला का उद्देश्य जिले के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों तथा स्व-सहायता समूहों को पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग की उपयोगिता, संभावनाओं और बाजार मांग से अवगत कराना रहा।
कार्यशाला में बड़ी संख्या में स्थानीय उद्यमी, नवोदित व्यवसायी और स्व-सहायता समूहों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जो पैकेजिंग सामग्री निर्माण के क्षेत्र में नए अवसर तलाश रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान भारतीय गुणवत्ता परिषद एवं सिपेट रायपुर के विषय विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों के माध्यम से ग्रीन पैकेजिंग (Green Packaging Initiative) से जुड़ी व्यावहारिक जानकारियां साझा कीं। विशेषज्ञों ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक, जैव-अपघटनीय और पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों से पैकेजिंग तैयार करने की विधियों, लागत प्रभावशीलता और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी बढ़ती मांग पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि ग्रीन पैकेजिंग केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का सशक्त जरिया भी बन सकती है। उन्होंने कहा कि ग्रीन पैकेजिंग (Green Packaging Initiative) के माध्यम से बस्तर के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान मिलेगी और जिले के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की रैम्प कार्यक्रम संचालक अंकिता पांडे ने योजना की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रैम्प योजना एमएसएमई सेक्टर को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत उद्यमियों को तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण के साथ-साथ विलंबित भुगतान जैसी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान में भी सहायता प्रदान की जाती है। वहीं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग के अरविंद तिवारी ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक लक्ष्मी वैद्य ने राज्यभर में रैम्प योजना के तहत संचालित गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उद्यमिता जागरूकता, निर्यात प्रशिक्षण, डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय पहुँच से जुड़े कार्यक्रम सूक्ष्म उद्योगों के लिए नए अवसर सृजित कर रहे हैं।
यह कार्यशाला बस्तर के उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों को आधुनिक, नवाचारी और इको-फ्रेंडली तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो सतत विकास के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।


