रायपुर, 27 दिसंबर। बिल बकाया होने पर अब बिजली विभाग के कर्मचारियों के आने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक क्लिक में सॉफ्टवेयर से बिजली कट करने का सिस्टम (Online Electricity Cut) पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। रायपुर सहित अन्य जिलों में लगभग 20 हजार कनेक्शन ऐसे बंद किए गए हैं, जिनका बिल दो महीने या इससे अधिक समय से लंबित था। इस नई प्रक्रिया से लोग चौकन्ना हो गए हैं, क्योंकि मीटर में लाइट जलती रहती है, लेकिन घरों और दुकानों तक सप्लाई नहीं पहुंचती।
बिजली विभाग (Online Electricity Cut) ने बताया कि बिल जमा करने के बाद लाइट वापस आने में दो से तीन घंटे का समय लग रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) ने इस प्रक्रिया के ट्रायल की जानकारी दी और कहा कि सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया जारी है। कंट्रोल रूम में समस्याओं की रिपोर्ट स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी को भेजी गई है।
अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट मीटर (Online Electricity Cut) में रिमोट सेंसर युक्त एक रिले लगा हुआ है। मीटर का बीपी नंबर सीएसपीडीसीएल के कंट्रोल रूम में अपलोड किया गया है। एमडीएम (Meter Data Monitoring) सिस्टम के माध्यम से ज्यादा बिल होने पर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से एक क्लिक में बिजली कट (स्मार्ट मीटर) दी जा सकती है। हालांकि, मीटर में लाइट जलने के बावजूद घरों तक सप्लाई नहीं पहुँचती।
इस प्रक्रिया में मोबाइल नेटवर्क का भी अहम रोल है। स्मार्ट मीटर के रिमोट सेंसर तक फ्रिक्वेंसी पहुंचने पर ही कनेक्शन कटता है। पहले चार-पांच बार सिस्टम मैसेज भेजता है, और 15 दिन की लेटलतीफी के बाद ही कनेक्शन काटा जाता है। पेमेंट गेटवे और बैंकिंग ट्रांजेक्शन में समय लगने के कारण बिजली वापस आने में देरी हो रही है, जिसे जल्द सुधार लिया जाएगा—संजीव सिंह, चीफ इंजीनियर, रायपुर सर्कल, सीएसपीडीसीएल।
देश के कई राज्यों में यह सिस्टम (स्मार्ट मीटर) लागू हो चुका है। मध्यप्रदेश, झारखंड में रिचार्ज सिस्टम के साथ ऑटोमेटिक कटिंग हो रही है, और रिचार्ज तुरंत करने पर ही बिजली वापसी होती है। छत्तीसगढ़ में प्री-पेड सिस्टम पर समय लग रहा है, लेकिन स्मार्ट मीटर से यह सुविधा जल्द लागू होगी।
प्रदेश में कुल घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या के अनुसार, लगभग 55 प्रतिशत घरों में स्मार्ट मीटर (Smart Meter) लगाए जा चुके हैं। 2027-28 तक सभी उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य है। टाटा पावर, हाइप्रिंट जीनस पावर और जीनस पावर यह काम कर रही हैं।
हालांकि, हाईटेक तरीके से कटने के बाद रसीद की प्रति बिजली कार्यालय में जमा करना जरूरी है। रसीद जमा होने के बाद जूनियर इंजीनियर इसे वॉट्सएप ग्रुप में साझा करते हैं। इसके घंटों बाद ही कनेक्शन वापस आता है, जिससे उपभोक्ताओं में असुविधा बनी रहती है।
सिस्टम (स्मार्ट मीटर) के लागू होने से बिजली विभाग को कर्मचारियों की ड्यूटी में आसानी हुई है, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं को समय पर बिजली मिलने में देरी हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी मुद्दों को ठीक कर लिया जाएगा और प्रदेश में स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली कटिंग और पुनः सप्लाई पूरी तरह स्वचालित होगी।


