सीजी भास्कर, 26 दिसंबर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजनीति में अगले साल अप्रैल में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा में छत्तीसगढ़ के कोटे की 5 में से 2 सीटें 9 अप्रैल 2026 को रिक्त हो रही हैं। इनमें फूलो देवी नेताम और केटीएस तुलसी की सीट शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन दोनों सीटों के लिए कांग्रेस और भाजपा में पहले से ही रणनीतिक तैयारी शुरू हो गई है। पार्टी नेताओं और क्षेत्रीय नेताओं के बीच जोरदार राज्यसभा चुनाव 2026 (Rajya Sabha Election 2026) की खींचतान देखी जा रही है।
कांग्रेस की तैयारी और आदिवासी समीकरण
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अपनी रिक्त होने वाली सीट पर किसी आदिवासी नेता को मौका देने की योजना बना रही है। पिछली बार कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के कोटे से राज्यसभा में अन्य राज्यों के नेताओं को भेजा था, जिससे पार्टी की छवि पर प्रश्नचिन्ह लगा था। इस बार कांग्रेस प्रदेश के किसी प्रभावशाली नेता को ही राज्यसभा भेजने पर जोर दे रही है।
फूलो देवी नेताम आदिवासी समाज से आती हैं और इस बार पार्टी जातिगत समीकरण के आधार पर ही अपना प्रत्याशी उतार सकती है। बस्तर और सरगुजा के आदिवासी नेता भी सक्रिय हो गए हैं और अंदरूनी चर्चाओं में उनका नाम प्रमुखता से सामने आया है। दोनों नेता पहले भी विधानसभा सदस्य रहे हैं और पार्टी हाईकमान अंतिम फैसला करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस के लिए यह राज्यसभा सीट का चुनाव न केवल राजनीतिक संतुलन बनाने का मौका है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव में आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति भी है।
भाजपा की रणनीति और अंदरूनी हलचल
भाजपा (BJP Chhattisgarh) के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है। पार्टी आदिवासी या ओबीसी नेताओं को लेकर दांव खेल सकती है। हालांकि अभी दावेदार खामोश हैं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। भाजपा के लिए यह सीट भविष्य की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने और विपक्षी दल की रणनीति को चुनौती देने का अवसर है। भाजपा आदिवासी या ओबीसी चेहरे को उतारकर कांग्रेस के समीकरण को चुनौती दे सकती है। इसके साथ ही पार्टी की कोशिश होगी कि अपनी एक सीट को बनाए रखे और भविष्य के लिए प्रदेश में राजनीतिक संतुलन बनाये।
Rajya Sabha Election 2026 का फॉर्मूला
छत्तीसगढ़ की कुल 90 विधानसभा सीटों के हिसाब से राज्यसभा चुनाव का फॉर्मूला लागू होता है। रिक्त सीटों की संख्या में एक जोड़कर विधायकों की संख्या से विभाजन किया जाता है। इस हिसाब से 2 राज्यसभा सीट में 1 जोड़ने पर 3 संख्या प्राप्त होती है। कुल विधायकों की संख्या यानी 90 में 3 से भाग देने पर भागफल 30 आता है। इसमें फिर 1 जोड़ने पर 31 नंबर आता है। इसका मतलब प्रत्याशी को जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों का समर्थन जरूरी है।
2028 तक इंतजार करना पड़ेगा
यदि अप्रैल 2026 में होने वाले चुनाव में कोई उम्मीदवार चूक जाता है या हार जाता है, तो उसे अगले अवसर का इंतजार 29 जून 2028 तक करना होगा। इस दिन राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन की सीट रिक्त होगी। इसलिए दोनों पार्टियों के लिए अप्रैल 2026 का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है।
वर्तमान स्थिति और पार्टी संतुलन
वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 5 राज्यसभा सांसदों में 4 कांग्रेस और 1 भाजपा के खाते में है। इसमें फूलो देवी नेताम, केटीएस तुलसी, राजीव शुक्ला, रंजीत रंजन और देवेंद्र प्रताप सिंह शामिल हैं। चार सांसद कांग्रेस के पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में बनाए गए थे, जबकि भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह को वर्ष 2024 में राज्यसभा भेजा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस चुनाव के परिणाम से प्रदेश में राजनीतिक संतुलन और अगली विधानसभा चुनाव की रणनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। राज्यसभा में आदिवासी प्रतिनिधित्व को लेकर भी पार्टी नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा तेज है।
आदिवासी वोट और सियासी जोड़-तोड़
बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी नेताओं की सक्रियता इस चुनाव को और दिलचस्प बनाती है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के लिए यह सीट सिर्फ सम्मान की नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने का जरिया है। दोनों दल अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर अभी से अंदरूनी तैयारियां शुरू कर चुके हैं।




