प्रदेश के नगरीय निकायों में प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा देने के लिए Mission Karmayogi Platform 2.0 को लागू किया जा रहा है। यह पहल शहरी शासन को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ नागरिकों के रोज़मर्रा के कामों को आसान और समयबद्ध बनाने पर केंद्रित है। इसका सीधा असर सफाई, पेयजल आपूर्ति और दस्तावेज़ सेवाओं की गुणवत्ता पर देखने को मिलेगा।
इस प्लेटफॉर्म के जरिए नगरीय प्रशासन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी (Digital Governance Training) के अंतर्गत आधुनिक तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और निर्णय क्षमता से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। प्रशिक्षण का मकसद केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर सेवाओं की गति और सटीकता को बेहतर बनाना है।
मिशन का सबसे अहम उद्देश्य (Citizen Centric Urban Services) को मजबूत करना है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जल कनेक्शन, सफाई शिकायत, स्ट्रीट लाइट जैसी सेवाएं अब कम समय में और कम औपचारिकताओं के साथ उपलब्ध हो सकेंगी। इससे नागरिकों और प्रशासन के बीच भरोसे की दूरी कम होगी।
Role Based Learning से हर कर्मचारी को मिलेगा लक्षित प्रशिक्षण
प्लेटफॉर्म 2.0 में परंपरागत प्रशिक्षण मॉडल की जगह (Role Based Learning) को अपनाया गया है। यानी जिस पद पर जो ज़िम्मेदारी है, उसी से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल आपूर्ति प्रणाली, शहरी नियोजन जैसे क्षेत्रों में इससे कार्यकुशलता में ठोस सुधार की उम्मीद है।
Online Capacity Building से कभी भी, कहीं भी सीखने की सुविधा
यह पहल केवल ऑफलाइन क्लास तक सीमित नहीं है। (Online Capacity Building) के तहत वीडियो लेक्चर, इंटरैक्टिव मॉड्यूल और मूल्यांकन प्रणाली शामिल की गई है, जिससे कर्मचारी अपनी सुविधा अनुसार कभी भी प्रशिक्षण ले सकेंगे। यह व्यवस्था सीखने की निरंतरता को बनाए रखने में मदद करेगी।
प्रदेश के सभी नगरीय निकाय होंगे प्लेटफॉर्म से जुड़े
जानकारी के अनुसार प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में इस प्लेटफॉर्म को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। मास्टर ट्रेनर्स की नियुक्ति के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रशिक्षण का लाभ अंतिम स्तर तक पहुंचे और शहरी सेवाओं की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में अहम कदम
Mission Karmayogi Platform 2.0 को शहरी प्रशासन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि अनावश्यक देरी और शिकायतों में भी कमी आने की संभावना है।


