सीजी भास्कर, 28 दिसंबर। महासमुंद जिले में धान के अवैध भंडारण, परिवहन और स्टॉक में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने एक साथ बड़ी कार्रवाई (Rice Mill Action) करते हुए तीन राइस मिलों पर शिकंजा कस दिया है। अलग-अलग मामलों में प्रशासन ने कुल 6,694 बोरा धान और 15,470 बोरा चावल जब्त किया है। इस कार्रवाई से जिले में अवैध धान कारोबार और मिलिंग में गड़बड़ी करने वालों में हड़कंप मच गया है।
सरायपाली क्षेत्र में जांच दल ने श्री साईं राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान मिल के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में गंभीर अंतर पाया गया। स्टॉक में भारी कमी सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 6,000 बोरा धान और 15,470 बोरा चावल जब्त कर लिया। अधिकारियों के अनुसार यह जब्ती सार्वजनिक वितरण प्रणाली और धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम है।
इसी क्रम में बसना क्षेत्र में प्रशासनिक टीम ने दो अन्य राइस मिलों पर दबिश दी। जांच के दौरान श्री शिव शंकर राइस मिल से 287 बोरा और कामद राइस मिल से 407 बोरा अवैध रूप से संग्रहित धान बरामद किया गया। दोनों मामलों में धान के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में धान खरीदी व्यवस्था की निगरानी लगातार की जा रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
धान उठाव के बाद चावल नहीं जमा करने का मामला
वहीं बलरामपुर जिले में भी प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए विकासखंड राजपुर के ग्राम कोटगगहना स्थित मित्तल राइस मिल को सील कर दिया है। खाद्य एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने कस्टम मिलिंग आदेश के उल्लंघन (Rice Mill Action) को गंभीर मानते हुए यह कदम उठाया। निरीक्षण के दौरान राइस मिल का मुख्य गेट बंद मिला और कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर उपस्थित नहीं था।
खाद्य विभाग के अनुसार विपणन वर्ष 2024-25 में मित्तल राइस मिल ने 3,320 क्विंटल धान का उठाव किया था, जिसके बदले 2,246.64 क्विंटल चावल जमा किया जाना था। लेकिन निरीक्षण की तिथि तक एक भी क्विंटल चावल जमा नहीं किया गया। इसे कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 का गंभीर उल्लंघन मानते हुए राइस मिल को सील कर दिया गया है।
प्रशासन ने साफ किया है कि धान और चावल के अवैध भंडारण, मिलिंग में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन पर आगे भी सख्त कार्रवाई (Rice Mill Action) जारी रहेगी। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के साथ किसानों के हितों की भी रक्षा होगी।


