सीजी भास्कर, 2 जनवरी। छत्तीसगढ़ की सियासत (Political Statement Controversy) में एक बार फिर भाषा और मर्यादा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उपमुख्यमंत्री अरुण साव को लेकर दिए गए छत्तीसगढ़ी बयान ने राजनीतिक रंग लेने के साथ-साथ सामाजिक असंतोष भी पैदा कर दिया है। बघेल के बयान के विरोध में साहू समाज ने तीखी नाराजगी जाहिर करते हुए सभी जिलों में पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपने का फैसला किया है।
साहू समाज ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि भूपेश बघेल ने 10 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इस पूरे प्रकरण को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
न्यूज बॉक्स : साहू समाज का अल्टीमेटम
छत्तीसगढ़ साहू समाज ने भूपेश बघेल (Political Statement Controversy) के बयान को समाज और संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताया है। समाज के अध्यक्ष नीरेंद्र साहू ने जानकारी दी कि 5 जनवरी को इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। साथ ही सभी जिलाध्यक्षों को पत्र जारी कर पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा विवाद
दरअसल, 29 दिसंबर 2025 को बिलासपुर दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिंगियाडीह क्षेत्र में चल रहे आंदोलन के समर्थन में सभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर तीखे राजनीतिक कटाक्ष किए।
छत्तीसगढ़ी भाषा में बोलते हुए भूपेश बघेल ने कहा “जंगल के सब राजा मन मिल के बेंदरा ल राजा बना दिन।” इस बयान को उपमुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना बंदर से किए जाने के रूप में देखा गया, जिसके बाद साहू समाज ने इसे अपमानजनक और अस्वीकार्य बताते हुए विरोध दर्ज कराया। यह विवाद अब राजनीतिक बयान विवाद (Political Statement Controversy) का रूप ले चुका है।
साहू समाज की आपत्ति
साहू समाज का कहना है कि उपमुख्यमंत्री अरुण साव समाज के गौरव हैं और उनके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। समाज ने कहा कि यह केवल राजनीतिक आलोचना नहीं, बल्कि व्यक्ति और समाज विशेष को नीचा दिखाने वाला बयान है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि समय रहते माफी नहीं मांगी गई तो यह आंदोलन राजनीतिक विवाद (Political Statement Controversy) से आगे बढ़कर सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है।
अरुण साव की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले में उपमुख्यमंत्री अरुण साव की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने संयमित शब्दों में कहा कि इतने वरिष्ठ नेता को सार्वजनिक मंच से बोलते समय शब्दों की मर्यादा और संवैधानिक गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन भाषा और उपमा का स्तर गिरना दुर्भाग्यपूर्ण है।
लिंगियाडीह आंदोलन से जुड़ा है बयान
उल्लेखनीय है कि बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में बस्ती उजाड़े जाने को लेकर पिछले 37 दिनों से स्थानीय आंदोलन चल रहा है। इसी आंदोलन के समर्थन में पहुंचे भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि बस्ती तोड़कर बनाए जा रहे गार्डन में क्या मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ टहलने आएंगे। इसी क्रम में उन्होंने उपमुख्यमंत्री अरुण साव के विभागों नगरीय निकाय, लोक निर्माण विभाग और जल जीवन मिशन पर काम न होने का आरोप लगाते हुए जंगल की कहानी के माध्यम से कटाक्ष किया, जो अब राजनीतिक बयान विवाद (Political Statement Controversy) का कारण बन गया है।
10 दिन का समय, फिर आंदोलन
साहू समाज के अध्यक्ष नीरेंद्र साहू ने दो टूक कहा है कि भूपेश बघेल के पास अब 10 दिन का समय है। यदि वे बयान वापस लेकर माफी नहीं मांगते हैं, तो समाज प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि यह मामला अब केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के सम्मान से जुड़ गया है।




