सीजी भास्कर, 03 जनवरी। महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल इलाके Gadchiroli से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाली घटना (Gadchiroli Pregnant Woman Death) सामने आई है। यहां प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचने की कोशिश कर रही एक गर्भवती महिला की रास्ते में ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि महिला को इलाज के लिए करीब 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, इसी दौरान अचानक उसका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया और उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
एंबुलेंस नहीं मिली, पैदल निकली अस्पताल
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत थी, लेकिन गांव में न तो एंबुलेंस उपलब्ध थी और न ही कोई निजी वाहन। मजबूरी में परिजनों और पड़ोसियों ने उसे सहारा देकर पैदल ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र की ओर ले जाना शुरू किया।
करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करते वक्त महिला की हालत बिगड़ती (Gadchiroli Pregnant Woman Death) चली गई। रास्ते में उसे चक्कर आने लगे और तेज़ सिरदर्द की शिकायत हुई, जो उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) के लक्षण बताए जा रहे हैं।
रास्ते में बिगड़ी हालत, नहीं मिल पाई समय पर मदद
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि महिला को पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी। ऐसे मामलों में तुरंत मेडिकल निगरानी और दवाइयों की जरूरत होती है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस दर्दनाक मौत ने एक बार फिर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर (Gadchiroli Pregnant Woman Death) कर दिया है। गढ़चिरौली जैसे दूरदराज जिलों में आज भी गर्भवती महिलाओं को समय पर एंबुलेंस, डॉक्टर और प्राथमिक उपचार नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर वाहन या एंबुलेंस मिल जाती, तो शायद महिला की जान बच सकती थी। वहीं अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि आपात स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से तुरंत संपर्क करें और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करें।
सिर्फ एक घटना नहीं, सिस्टम की चेतावनी
यह मामला किसी एक लापरवाही तक सीमित (Gadchiroli Pregnant Woman Death) नहीं है, बल्कि यह बताता है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं और हकीकत के बीच अब भी बड़ा फासला है। गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित मातृत्व की बात करने वाले सिस्टम के सामने गढ़चिरौली की यह घटना एक कड़वी सच्चाई बनकर खड़ी है।





