सीजी भास्कर, 5 जनवरी। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की बिहान योजना से जुड़ी महिलाएं सोमवार को राजधानी रायपुर की सड़कों पर उतर (Bihan Yojana Chhattisgarh) आईं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंची सैकड़ों महिलाओं ने राजीव गांधी चौक पर सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का साफ कहना है कि जब तक संबंधित विभाग के मंत्री से सीधी बातचीत नहीं होती, वे सड़क से हटने वाली नहीं हैं।
धरने पर बैठी महिलाओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से वे सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो स्थायी नौकरी का भरोसा मिला और न ही सम्मानजनक मानदेय। लगातार आश्वासन मिलने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
1910 रुपये मानदेय में गुजारा मुश्किल
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बताया कि वर्तमान में उन्हें केवल 1910 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। महिलाओं का कहना है कि इस राशि से न तो परिवार का खर्च (Bihan Yojana Chhattisgarh) चल पाता है और न ही फील्ड वर्क से जुड़े खर्च पूरे हो पाते हैं। उन्होंने मांग की कि मानदेय को छत्तीसगढ़ शासन के न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप बढ़ाया जाए।
महिलाओं ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में इसी तरह कार्यरत महिलाओं को 6000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की बराबर हिस्सेदारी होती है, जबकि छत्तीसगढ़ में इतना कम मानदेय देना अन्यायपूर्ण है।
निजी मोबाइल और खर्च से कराया जा रहा सरकारी काम
धरने पर मौजूद महिलाओं ने बताया कि उनसे लगातार ऑनलाइन रिपोर्टिंग और डाटा एंट्री का काम लिया जाता है, लेकिन इसके लिए न तो सरकारी मोबाइल दिया गया है और न ही इंटरनेट खर्च की कोई भरपाई की जाती है। महिलाएं अपने निजी मोबाइल और अपने पैसों से रिचार्ज कर सरकारी काम करने को मजबूर हैं। उनकी मांग है कि सभी कैडर को सरकारी मोबाइल दिया जाए या फिर मोबाइल व इंटरनेट भत्ता प्रदान किया जाए।
यात्रा और मीटिंग भत्ता भी नहीं
महिलाओं का कहना है कि नियमित रूप से मीटिंग, प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के लिए बुलाया (Bihan Yojana Chhattisgarh) जाता है, लेकिन इसके बदले कोई यात्रा भत्ता, मीटिंग भत्ता या दैनिक भत्ता नहीं दिया जाता, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।
जबरन हटाने और भुगतान में देरी के आरोप
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से काम कर रहीं कई सक्रिय महिलाओं को जबरन कार्य से हटाया जा रहा है। इसके साथ ही कई ब्लॉकों में मानदेय 5–6 महीने में एक बार दिया जाता है और कई बार बिना कारण राशि काट ली जाती है। महिलाओं की मांग है कि मानदेय हर महीने समय पर और सीधे बैंक खाते में दिया जाए।
नियुक्ति पत्र और नियमितीकरण की मांग
धरने पर बैठी महिलाओं ने बताया कि लंबे समय से काम करने के बावजूद उन्हें आज तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। उन्होंने अपने नियमितीकरण की भी मांग उठाई है, ताकि भविष्य सुरक्षित हो सके। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि मंत्री स्तर पर बातचीत नहीं हुई और मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।





