सीजी भास्कर, 6 जनवरी। बलरामपुर जिले के वन परिक्षेत्र धमनी अंतर्गत सामने आए जंगली सूअर शिकार प्रकरण (Wild Boar Hunting Case) में आखिरकार पंडो समाज की एकजुटता और जागरूकता का ठोस परिणाम देखने को मिला है। समाज के संगठित विरोध और लिखित शिकायत के बाद वन विभाग ने कार्रवाई तेज करते हुए मामले में फरार सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार सनावल के झारा परिसर क्षेत्र में जंगली सूअर का अवैध शिकार कर उसके मांस को काटने, विक्रय करने तथा पकाकर खाने का गंभीर मामला सामने आया था। इस संबंध में वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया था। प्रारंभिक कार्रवाई में वन विभाग ने चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था, लेकिन गांव के प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से पंडो समाज में असंतोष व्याप्त था।
पंडो समाज का आरोप था कि शिकार की पूरी साजिश गांव के रसूखदार लोगों द्वारा रची गई थी और उन्हीं के इशारे पर यह अवैध गतिविधि कराई गई। समाज का कहना था कि केवल मोहरे बनाए गए लोगों पर कार्रवाई कर असली दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
लिखित शिकायत के बाद बदली कार्रवाई की दिशा
इस मामले को लेकर पंडो समाज ने एकजुट होकर वनमंडलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और सभी दोषियों पर समान कार्रवाई की मांग की। समाज की एकता और दबाव के बाद वन विभाग ने फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया।
वनमंडलाधिकारी आलोक कुमार बाजपेयी के निर्देश पर एसडीओ वाड्रफनगर एवं रेंजर धमनी के नेतृत्व में सघन अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान फरार सात आरोपित संतोष, रामकुमार, प्रदीप, सूर्यकांत, दिनेश, देवनाथ और ईश्वर को गिरफ्तार किया गया। सभी को न्यायालय रामानुजगंज में प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायालय के आदेश पर उन्हें जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपितों में दिनेश सिंह उपसरपंच है, जबकि प्रदीप सिंह भी पंचायत से जुड़ा हुआ प्रभावशाली व्यक्ति बताया जा रहा है। बताया गया कि ये सभी स्वयं को लंबे समय से प्रकरण से अलग दिखाने का प्रयास कर रहे थे।
पंडो समाज ने बताया बड़ी जीत
पंडो समाज के लोगों ने इसे अपने अधिकारों और वन्य जीव संरक्षण के लिए बड़ी जीत बताया है। समाज का कहना है कि यह कार्रवाई साबित करती है कि संगठित आवाज और शांतिपूर्ण संघर्ष से न्याय संभव है। समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में वन और वन्य प्राणियों के खिलाफ किसी भी अवैध गतिविधि का संगठित विरोध किया जाएगा। इस कार्रवाई में वन विभाग की टीम में वनपाल मथुरा दुबे, अश्वनी कुमार बैगा और वनरक्षक रामकुमार यादव की सक्रिय भूमिका रही।


