सीजी भास्कर, 06 जनवरी। धमतरी जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता (Female Naxalite Surrender) मिली है। बस्तर के लाल आतंक का एक और अध्याय समाप्त करते हुए कुख्यात महिला नक्सली भूमिका उर्फ गीता ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। गीता पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई थी। उसने धमतरी पुलिस अधीक्षक के समक्ष सरेंडर कर नक्सली संगठन से नाता तोड़ने का ऐलान किया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गीता की गतिविधियों पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नजर बनाए हुए थीं। उसके आत्मसमर्पण को नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक अहम सफलता माना जा रहा है।
नगरी एरिया कमेटी सदस्य और गोबरा LOS की कमांडर
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भूमिका उर्फ गीता नक्सली संगठन में नगरी एरिया कमेटी की सदस्य थी और साथ ही गोबरा LOS (लोकल ऑपरेटिंग स्क्वॉड) की कमांडर के रूप में सक्रिय भूमिका (Female Naxalite Surrender) निभा रही थी। वह वर्ष 2005 से नक्सली संगठन से जुड़ी हुई थी और कई बड़ी नक्सली घटनाओं व आपराधिक गतिविधियों में उसकी संलिप्तता सामने आई थी। संगठन के भीतर उसकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी, जिस वजह से वह लंबे समय तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रही।
इनामी नक्सली ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
धमतरी पुलिस ने बताया कि गीता ने आत्मसमर्पण कर अपने ऊपर घोषित 5 लाख रुपये के इनाम को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरेंडर के बाद उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उसे आगे की सुविधा दी जाएगी।
बस्तर में सिमटता माओवादी प्रभाव
गौरतलब है कि हाल के दिनों में बस्तर अंचल में माओवादियों के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया (Female Naxalite Surrender) जा रहा है। कभी बस्तर के सात जिलों में फैला नक्सली प्रभाव अब सिमटकर केवल कुछ सीमित इलाकों तक रह गया है। वर्तमान में माओवादी गतिविधियां मुख्य रूप से बीजापुर और सुकमा जिले के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित बताई जा रही हैं। सुरक्षा बलों के दबाव के चलते संगठन की कई एरिया कमेटियां कमजोर हो चुकी हैं।
शीर्ष कैडर भी निशाने पर
सूत्रों के अनुसार, बस्तर में माओवादी संगठन के शीर्ष कैडर में अब केवल दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का सदस्य पापाराव ही सक्रिय बताया जा रहा है। उसकी तलाश में फोर्स लगातार अभियान चला रही है। इसके अलावा DVCM और ACM स्तर के कुछ माओवादी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपते फिर रहे हैं।
आत्मसमर्पण के लिए दी गई समय-सीमा
साल 2026 की शुरुआत में ही सुरक्षा बलों ने सुकमा जिले की कोंटा एरिया कमेटी को समाप्त कर माओवादी संगठन को स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब बस्तर में उनके लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने भी माओवादियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि तय समय-सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करें, अन्यथा उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।





