सीजी भास्कर, 6 जनवरी। ग्राम पंचायत धर्मापुर में बीते तीन वर्षों से बिना किसी वैधानिक अनुमति के संचालित ईसाई मिशनरी के अवैध आश्रम का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यहां आठ किशोर-किशोरियों को लंबे समय से रखे जाने की जानकारी अब जाकर सामने आई है। मीडिया में मामला उजागर होने और हिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया, जिसके बाद बच्चों को प्रशासनिक संरक्षण में लेते हुए बालक एवं बालिका गृह भेजा गया है, जबकि आश्रम संचालन से जुड़े डेविड चाको को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
राजनांदगांव प्रशासन ने बुधवार सुबह (Missionary Illegal Ashram Case) की जांच शुरू की थी, लेकिन पूरे दिन की कवायद के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो सका कि बच्चों को कब, कैसे और किसकी अनुमति से यहां लाया गया था। न ही अब तक यह सामने आ पाया है कि बाल संरक्षण कानूनों के तहत किसी प्रकार की वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
बताया गया है कि आश्रम से बरामद किए गए सभी बच्चे कांकेर जिले के आमाबेड़ा गांव के निवासी हैं। वही आमाबेड़ा गांव, जहां पूर्व में मतांतरण के आरोपों को लेकर भारी विवाद हुआ था और हिंदू संगठनों ने छत्तीसगढ़ बंद तक का आह्वान किया था। बच्चों का आमाबेड़ा से संबंध सामने आने के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
पूरे दिन गायब रहे डेविड चाको को पुलिस ने दोपहर बाद हिरासत में लिया, हालांकि उसकी भूमिका, फंडिंग और नेटवर्क को लेकर पुलिस फिलहाल कुछ भी कहने से बचती नजर आई। (Missionary Illegal Ashram Case) में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने लंबे समय तक यह आश्रम प्रशासन की नजरों से कैसे ओझल रहा।
मंगलवार सुबह विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता धर्मापुर पहुंचे और आश्रम का निरीक्षण करने की मांग की। पुलिस ने उन्हें मौके पर ही रोक दिया। बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। बाद में पुलिस और बाल संरक्षण अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई। हिंदू संगठनों ने पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा से मुलाकात कर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
हिंदू संगठनों का कहना है कि पूरे धर्मापुर क्षेत्र में इतनी ऊंची और भव्य इमारत कहीं नहीं है, जितनी इस आश्रम की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मिशनरी गतिविधियों के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की जा रही है। यह फंड कहां से आ रहा है, कैसे खर्च किया जा रहा है और किन लोगों के माध्यम से यह नेटवर्क चल रहा है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए। संगठनों ने आदिवासी समाज को बहला-फुसलाकर मतांतरण कराने के आरोप भी लगाए हैं और डेविड चाको से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।
सिलाई केंद्र की अनुमति, हकीकत में आश्रम संचालन
ग्राम पंचायत धर्मापुर के सरपंच कोमल टंडन के अनुसार डेविड चाको ने एक किसान से जमीन खरीदी थी और पंचायत से भवन निर्माण कर सिलाई केंद्र खोलने एवं निवास की अनुमति ली थी। लाखों रुपये खर्च कर तीन मंजिला इमारत बनाई गई, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यहां वर्षों से बच्चों को रखा जा रहा था और कई बार प्रार्थना सभाएं भी आयोजित होती थीं। (Missionary Illegal Ashram Case) में यह पहलू प्रशासनिक लापरवाही की ओर भी इशारा कर रहा है। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है और डेविड चाको से पूछताछ जारी है। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


