सीजी भास्कर, 8 जनवरी। बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उस समय विवाद का कारण बन गई, जब वन विभाग की टीम और ग्रामीण आमने-सामने आ गए। बुधवार दोपहर शुरू हुआ यह विवाद करीब एक घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति में बदल गया। इस पूरे घटनाक्रम में ग्रामीणों ने वन कर्मचारियों पर मारपीट और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि विभाग ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें दबाव बनाने की कोशिश बताया है। मामला (Forest Land Encroachment Balrampur) से जुड़ा होने के कारण इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार यह मामला पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र का है। बताया गया कि मंगलवार रात वन भूमि पर एक्सीवेटर मशीन की मदद से अस्थायी निर्माण किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार यहां होटल खोलने की तैयारी चल रही थी। यह निर्माण वनरक्षक के निवास से महज दस मीटर की दूरी पर किया गया था, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह निर्माण अवैध था, तो उसी रात कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसी बिंदु को लेकर (Forest Land Encroachment Balrampur) का विवाद गहराता चला गया।
बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे जब वन विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने मौके पर पहुंची, तो ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते बहस तेज हो गई और हालात बिगड़ने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि वन भूमि पर कब्जा कराने के नाम पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कुछ लोगों से दो हजार, पांच हजार और दस हजार रुपये तक की राशि ली गई। इन्हीं आरोपों को लेकर ग्रामीणों ने नारेबाजी की और कथित रूप से ली गई रकम वापस करने की मांग की। इस दौरान (Forest Land Encroachment Balrampur) को लेकर आक्रोश खुलकर सामने आया।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब रात में एक्सीवेटर मशीन से निर्माण हो रहा था, तब वन विभाग ने तत्काल मशीन जब्त कर कार्रवाई क्यों नहीं की। यदि वन भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा था, तो उसी समय रोक क्यों नहीं लगाई गई। इन सवालों के जवाब न मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से भी लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। हालात बेकाबू होते देख वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई, जिनके हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि ईमानदारी से जांच कराई जाए, तो कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। उनका कहना है कि (Forest Land Encroachment Balrampur) के नाम पर लंबे समय से मनमानी चल रही है और कार्रवाई चयनित लोगों पर ही की जाती है।
इस मामले में वन विभाग का पक्ष रखते हुए डीएफओ आलोक वाजपेयी ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण किया गया था, जिसे नियमानुसार हटाया गया है। उन्होंने रिश्वत और मारपीट के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई से बचने के लिए बनाया गया दबाव है। डीएफओ ने स्पष्ट किया कि वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। (Forest Land Encroachment Balrampur) को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।


