सीजी भास्कर, 28 मई। दुनियाभर में AI टूल्स के जरिए सॉफ्टवेयर हैकिंग और साइबर अटैक के बढ़ते मामलों को देखते हुए Google ने अपना नया AI आधारित साइबर सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म “Google AI Threat Defense” लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम साइबर खतरों को पहले से पहचानकर उन्हें बिजनेस पर असर डालने से पहले ही रोकने में सक्षम होगा। (Google AI Threat Defense)
AI आधारित साइबर सिक्योरिटी पर बढ़ा फोकस : Google AI Threat Defense
बीते कुछ महीनों में बड़ी टेक कंपनियां AI आधारित साइबर सिक्योरिटी सिस्टम पर तेजी से काम कर रही हैं। Google से पहले अप्रैल में Anthropic ने “Claude Mythos” नाम का साइबर सिक्योरिटी फोक्स्ड AI मॉडल लॉन्च किया था। वहीं मई 2026 में OpenAI ने GPT 5.5 आधारित “Daybreak” प्लेटफॉर्म पेश किया था।अब Google ने भी इस रेस में उतरते हुए अपना एडवांस्ड सिक्योरिटी सिस्टम लॉन्च कर दिया है।
क्या करता है Google AI Threat Defense?
Google Cloud के COO और Security Products के प्रेसिडेंट फ्रांसिस डिसूजा ने ब्लॉग पोस्ट में बताया कि AI Threat Defense किसी भी ऑर्गनाइजेशन को संभावित “Attack Path” का अनुमान लगाने में मदद करता है।यह सिस्टम सबसे बड़े खतरों को प्राथमिकता देता है और उन कमजोरियों को जल्दी से ठीक करने में सहायता करता है जिनका फायदा साइबर अपराधी उठा सकते हैं।
हजारों फर्जी अलर्ट की समस्या होगी खत्म
Google के मुताबिक मौजूदा AI साइबर सिक्योरिटी सिस्टम की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे सिक्योरिटी टीमों पर हजारों AI जनरेटेड अलर्ट का बोझ डाल देते हैं।ऐसे में असली खतरे और सामान्य कमजोरियों के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है। Google का नया सिस्टम केवल उन्हीं खतरों पर फोकस करता है जो वास्तव में इंटरनेट से एक्सेस किए जा सकते हैं या लाइव नेटवर्क में मौजूद हैं।
Wiz प्लेटफॉर्म के साथ काम करेगा सिस्टम
Google AI Threat Defense को क्लाउड सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म “Wiz” के साथ इंटीग्रेट किया गया है। यह सिस्टम कोड स्कैनिंग के जरिए यह जांचता है कि कोई वल्नरेबिलिटी वास्तव में एक्टिव है या नहीं।अगर किसी कोड में गंभीर कमी मौजूद है लेकिन वह पूरी तरह आइसोलेटेड है और बाहरी दुनिया से जुड़ी नहीं है, तो सिस्टम उसकी प्राथमिकता कम कर देता है।




