सीजी भास्कर, 8 जनवरी। राज्य में 23 जनवरी से लागू होने जा रही पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था (Raipur Police Commissionerate) को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रायपुर और बिरगांव नगर निगम क्षेत्र के 22 शहरी थानों में ही कमिश्नरी प्रणाली लागू की जा रही है, जबकि नवा रायपुर अटलनगर सहित अभनपुर, आरंग, खरोरा और तिल्दा को देहात क्षेत्र मानते हुए वहां ग्रामीण पुलिस अधीक्षक की व्यवस्था बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। इसी बिंदु पर सबसे अधिक आपत्तियां सामने आ रही हैं।
पुलिस महकमे (Raipur Police Commissionerate) से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नवा रायपुर को पिछले डेढ़ दशक से राज्य के पहले स्मार्ट सिटी और उभरते शहरी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में उसे देहात की श्रेणी में रखकर अलग पुलिस ढांचे के अधीन करना व्यावहारिक नहीं लगता। इससे न केवल कानून-व्यवस्था के संचालन में बाधा आ सकती है, बल्कि भविष्य में प्रशासनिक समन्वय की समस्या भी खड़ी हो सकती है।
हाल ही में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि शहरी क्षेत्र में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होगी, जबकि नवा रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीण एसपी की तैनाती रहेगी। पुलिस मुख्यालय के स्तर पर इस निर्णय को लेकर यह चिंता भी जताई जा रही है कि दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण अपराध नियंत्रण और त्वरित कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, रायपुर में कमिश्नरी प्रणाली (Raipur Police Commissionerate) लागू करने से पहले विधि विशेषज्ञों की एक समिति ने देश के 80 से अधिक शहरों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया था। इसके बावजूद उस रिपोर्ट पर न तो कोई विस्तृत चर्चा हुई और न ही उसे सार्वजनिक किया गया। इससे नीति निर्धारण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
एडीजी गुप्ता समिति ने ओडिशा मॉडल को अपनाने की सिफारिश की थी, जहां पुलिस को पूर्ण दंडाधिकारी अधिकार प्राप्त हैं। इसके विपरीत रायपुर में मध्यप्रदेश की तरह सीमित अधिकारों वाली व्यवस्था लागू किए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इस पूरे विषय पर गृह विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
क्या है विवाद का मुख्य बिंदु
- नवा रायपुर को देहात क्षेत्र में शामिल किया जाना
- स्मार्ट सिटी होने के बावजूद ग्रामीण एसपी के अधीन व्यवस्था
- दो अलग पुलिस ढांचों से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
- भविष्य के राज्य राजधानी क्षेत्र को लेकर नीति में असंगति


