सीजी भास्कर, 03 जून। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बैंक ऋण विवाद से जुड़े मामले में कारोबारी विजय कुमार केला को राहत देते हुए सीबीआई की एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि जब बैंक और कर्जदार के बीच आपसी सहमति से समझौता हो चुका हो तथा उसे वैधानिक स्वीकृति भी मिल गई हो, तब उसी मामले में आपराधिक मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। (Criminal proceedings stayed after settlement with bank)
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा : Criminal proceedings stayed after settlement with bank
शीर्ष अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि बैंक ऋण खाते का निपटारा वन-टाइम सेटलमेंट या आपसी समझौते के जरिए हो जाने और उस पर संबंधित प्राधिकरण की मुहर लगने के बाद धोखाधड़ी के आरोपों पर आपराधिक कार्रवाई जारी रखना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक आपराधिक मुकदमे देश की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं और इससे भविष्य में कर्जदार बैंकिंग समझौतों से बचने लगेंगे।
ऋण विवाद और समझौते का पूरा मामला
मामला रायपुर निवासी कारोबारी विजय कुमार केला और उनकी फर्म से जुड़ा है। फर्म ने बैंक से ऋण लिया था, जिसकी राशि समय के साथ बढ़कर करोड़ों रुपये हो गई। व्यवसायिक परिस्थितियों और पारिवारिक कारणों के चलते ऋण की अदायगी प्रभावित हुई, जिसके बाद बैंक ने खाते को एनपीए घोषित कर दिया। बाद में ऋण वसूली न्यायाधिकरण में मामला लंबित रहने के दौरान दोनों पक्षों के बीच बकाया राशि के निपटारे के लिए समझौता हुआ और तय राशि जमा कर खाते का पूर्ण एवं अंतिम निपटारा कर दिया गया।
सीबीआई जांच और अदालत का अंतिम निर्णय : Criminal proceedings stayed after settlement with bank
समझौते के वर्षों बाद बैंक की शिकायत पर सीबीआई ने आरोप लगाया कि ऋण सीमा बढ़वाने और गिरवी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितताएं की गई थीं। इसके आधार पर जांच एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट पेश की थी। मामला उच्च न्यायालय से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद एफआईआर, चार्जशीट और संबंधित न्यायिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। अदालत ने माना कि समझौते के बाद इस तरह की आपराधिक कार्रवाई जारी रखना न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।




