सीजी भास्कर, 03 जून। गरियाबंद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवभोग के खण्ड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. प्रकाश साहू पर मरीज से अभद्र व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगा है. सुपेबेड़ा निवासी टंकधर आडील का आरोप है कि बीएमओ ने दवा मांगने पर अभद्र व्यवहार और थप्पड़ मारने की धमकी दी. जिसके बाद एक ओर समाज ने बीएमओ को हटाने की मांग तक कर दी है. (BMO accused of misbehaving with patient)
वहीं अब देवभोग ब्लॉक के स्वास्थ्य कर्मचारी बीएमओ के बचाव में उतर गए हैं. स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बुधवार को एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया है. उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है.
एसडीएम को दिए पत्र में बताया गया कि बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू अपने शासकीय दायित्व का निर्वहन निष्ठा, समर्पण और सकारात्मक भाव से कर रहे हैं. उन्होंने हमेशा मरीजों के हित, कर्मचारियों के मार्गदर्शन और शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए काम किया है.
काम बंद की करने की दी चेतावनी : BMO accused of misbehaving with patient
स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि बिना पर्याप्त तथ्यों के शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है. ऐसे आधारहीन आरोपों से अधिकारियों का मनोबल टूट रहा है और शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है.कर्मचारियों ने टंकधर आडिल की शिकायत की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच कराने की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी कि जांच पूरी होने तक एकपक्षीय कार्रवाई या भविष्य में अस्पताल परिसर में शासकीय कार्य में बाधा डालने पर विकासखंड के समस्त स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारी कार्य बंद/धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे.
दवा और सुविधा में कटौती का खामियाजा भुगत रहा स्वास्थ अमला
दरअसल, पिछले एक दशक तक सुपेबेड़ा में किडनी पीड़ितों को पर्याप्त दवा, जांच एवं स्वास्थ्य सुविधा दी जा रही थी. लेकिन पिछले एक साल में निःशुल्क दवाओं की उपलब्धता में भारी कटौती की गई है. इस अचानक हुए कटौती को मरीज स्थानीय स्तर पर कोई खेल समझ बैठे हैं. आडील के साथ उठे विवाद भी इसी दवा कटौती का एक हिस्सा है. अडील अपनी पीड़ित पत्नी के लिए दवा की मांग करते आ रहा था. दवा नहीं मिलने पर अडील ने डॉक्टरों पर दवा बेचने का आरोप लगाया, जिसके बाद विवाद की स्थिति बनी.
देवभोग में डॉक्टरों की कमी : BMO accused of misbehaving with patient
बता दें कि साल भर पहले तक देवभोग अस्पताल में डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या थी. 8 से ज्यादा डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे थे. लेकिन संविदा डॉक्टरों की वापसी के बाद स्थिति यह है कि अस्पताल में अब संख्या आधी रह गई है.




