सीजी भास्कर, 12 जनवरी। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक (Presidential Phone Call) ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की होती, तो भारत-अमेरिका ट्रेड डील पूरी हो सकती थी। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे सटीक नहीं बताया और समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसी के साथ यह सवाल उठता है कि आखिर राष्ट्राध्यक्ष फोन कॉल कैसे करते हैं और यह आम कॉल से क्यों अलग होती है।
अचानक नहीं होती बातचीत
अंतरराष्ट्रीय राजनीति (Presidential Phone Call) में अक्सर यह सुनने को मिलता है कि प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति ने कॉल नहीं की। आम लोगों को लगता है कि नेता सीधे फोन उठाकर बात कर लेते होंगे, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। दो राष्ट्राध्यक्षों या प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत किसी सामान्य मोबाइल कॉल जैसी नहीं होती, बल्कि यह एक पूरी तरह सुरक्षित, पूर्व-नियोजित और संस्थागत प्रक्रिया होती है, जिसमें कई स्तरों पर तैयारी की जाती है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के शीर्ष नेता कभी भी यूं ही फोन नहीं मिलाते। कॉल से पहले दोनों देशों के विदेश मंत्रालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी आपस में संपर्क करते हैं। सबसे पहले तय किया जाता है कि बातचीत की जरूरत क्यों है, किन मुद्दों पर चर्चा होगी और कॉल कितनी देर चलेगी।
स्टाफ-टू-स्टाफ समन्वय की अहम भूमिका
दो देशों (Presidential Phone Call) के नियमित और मजबूत रिश्तों में प्रक्रिया थोड़ी सरल हो सकती है। ऐसे मामलों में एक देश का सिचुएशन रूम सीधे दूसरे देश के समकक्ष कार्यालय को सूचना देता है कि राष्ट्राध्यक्ष बातचीत करना चाहते हैं। जहां संपर्क कम होता है, वहां राजदूत औपचारिक अनुरोध भेजते हैं और प्रस्तावित एजेंडा, व्यस्त कार्यक्रम के अनुसार समय तय कराया जाता है। यानी कॉल से पहले पूरी टीम पर्दे के पीछे काम करती है।
हमेशा सुरक्षित लाइन पर होती कॉल
राष्ट्राध्यक्ष कभी भी सामान्य मोबाइल या लैंडलाइन का इस्तेमाल नहीं करते। इसके लिए एन्क्रिप्टेड और हाई-सिक्योरिटी कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग होता है। अमेरिका में कॉल्स अक्सर White House Situation Room के जरिए की जाती हैं, जबकि भारत में PMO और विदेश मंत्रालय की सुरक्षित व्यवस्था इसका जिम्मा संभालती है। कई बार सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी होती है, लेकिन फोन कॉल अधिक प्रचलित है।
कॉल से पहले पूरी ब्रीफिंग
दो नेताओं (Presidential Phone Call) की बातचीत बिना तैयारी के नहीं होती। कॉल से पहले उन्हें विस्तृत ब्रीफिंग दी जाती है। अमेरिका में राष्ट्रपति को National Security Council (NSC) की ओर से डोज़ियर दिया जाता है, जिसमें सामने वाले नेता की पृष्ठभूमि, बातचीत के मुख्य बिंदु और संवेदनशील मुद्दों पर रणनीति शामिल होती है। गंभीर मुद्दों के मामले में अधिकारी कॉल को भी मॉनिटर कर सकते हैं।
भाषा और दुभाषिए की अहमियत
अधिकारी बातचीत अक्सर मातृभाषा में करते हैं, ताकि शब्दों का सही अर्थ और भाव सुरक्षित रहे। प्रोफेशनल दुभाषिए मौजूद रहते हैं ताकि अनुवाद में कोई गलती न हो।
क्या नेता अकेले बात करते हैं?
अक्सर नहीं। संवेदनशील मुद्दों पर वरिष्ठ सलाहकार, सुरक्षा अधिकारी या तकनीकी स्टाफ कॉल को मॉनिटर करते हैं, जिससे बातचीत का सही रिकॉर्ड बना रहे और गलतफहमी की संभावना कम हो।
हॉटलाइन, फोन नहीं, आपात संचार प्रणाली
अमेरिका-रूस हॉटलाइन जैसे सिस्टम साधारण टेलीफोन नहीं होते। ये सिर्फ आपात स्थितियों, जैसे युद्ध या परमाणु संकट में इस्तेमाल किए जाते हैं। सामान्य कूटनीतिक बातचीत इसके जरिए नहीं होती।


