सीजी भास्कर, 13 जनवरी| छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने (Durg College Fraud) आया है। यहां एक निजी फार्मेसी कॉलेज में पदस्थ प्रोफेसर पति-पत्नी पर छात्रों से एडमिशन फीस लेकर उसे कॉलेज के खाते में जमा करने के बजाय अपने निजी खातों में डालने का गंभीर आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की, आखिरकार अदालत के आदेश के बाद 10 महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई।
छात्रों से ली गई फीस, कॉलेज तक नहीं पहुंची रकम
मामला उतई थाना क्षेत्र के महेकाखुर्द स्थित प्रिज्म कॉलेज ऑफ फार्मेसी से जुड़ा है। कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत सागर शर्मा और उनकी पत्नी गुरदीप कौर शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने कुल 12 छात्रों से एडमिशन फीस के रूप में 3 लाख 45 हजार रुपये वसूले, लेकिन यह राशि कॉलेज के आधिकारिक खाते में जमा नहीं की।
बताया गया कि कुछ छात्रों से नगद रकम ली गई, जबकि कुछ से UPI के जरिए पैसे मंगवाए गए, जिन्हें सीधे निजी खातों में ट्रांसफर कराया गया।
कैसे खुला मामला?
जब फरवरी 2025 में कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों से फीस जमा करने को कहा, तब छात्रों ने पहले ही भुगतान किए जाने (Durg College Fraud) की बात कही। यहीं से पूरे खेल का खुलासा हुआ।
दो सत्रों तक चलता रहा खेल
कॉलेज प्रबंधन की शिकायत के अनुसार, सत्र 2023 में प्रथम वर्ष के 6 छात्रों से प्रति छात्र 20-20 हजार रुपये नगद लिए गए। न तो कॉलेज रसीद दी गई और न ही राशि अकाउंट में दिखाई दी। इसके बाद सत्र 2024 में भी 6 अन्य छात्रों से फीस ली गई, जिसे आरोपियों ने अपने खाते और एक परिजन के खाते में ट्रांसफर करवाया।
आंतरिक जांच में दोषी, फिर भी अधूरी भरपाई
मामले के उजागर होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने तीन वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों की जांच समिति बनाई। समिति ने 24 फरवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें दोनों असिस्टेंट प्रोफेसरों को दोषी ठहराया गया।
जांच के बाद कॉलेज ने आरोपियों को तीन दिन में पूरी राशि लौटाने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने कुल रकम में से केवल 1 लाख 95 हजार रुपये ही वापस किए। शेष 1 लाख 50 हजार रुपये अब तक जमा नहीं किए गए।
पुलिस ने क्यों नहीं की कार्रवाई?
कॉलेज प्रबंधन ने पहले थाना उतई और फिर पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत दी, लेकिन दोनों स्तर पर कोई FIR दर्ज नहीं की गई। आखिरकार अदालत की शरण लेनी पड़ी।
कोर्ट ने माना—पद का दुरुपयोग हुआ
कॉलेज की प्राचार्य सीमा कश्यप ने सभी दस्तावेजों और शपथपत्र के साथ न्यायालय में आवेदन पेश किया। अदालत ने प्रारंभिक जांच में माना कि आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग कर छात्रों से फीस ली और उसे निजी उपयोग में लिया।
इसके बाद न्यायालय ने उतई थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर विधिवत विवेचना शुरू करने का आदेश (Durg College Fraud) दिया है। साथ ही, तय समय पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
2023 से शुरू हुआ कॉलेज, उसी साल शुरू हुआ गबन
गौरतलब है कि प्रिज्म कॉलेज ऑफ फार्मेसी की स्थापना वर्ष 2023 में हुई थी। इसी सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्रों के साथ कथित गबन की शुरुआत हुई और यह सिलसिला अगले शैक्षणिक सत्र तक चलता रहा।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश जारी है। यह केस न सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी का है, बल्कि शिक्षा संस्थानों में भरोसे पर लगे दाग की भी गंभीर मिसाल बनता जा रहा है।





