सीजी भास्कर,15 जनवरी। छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों (Chhattisgarh Mineral Revenue) के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ राज्य बन रहा है। सचिव खनिज संसाधन विभाग पी. दयानंद ने रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं। राज्य सरकार द्वारा इन खनिजों के अन्वेषण और उत्खनन के लिए खनिज ब्लॉक तैयार कर नीलामी एवं अन्य माध्यमों से खनन हेतु उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे बीते दो वर्षों में राज्य शासन के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) राज्य में खनिज अन्वेषण, खनन और विपणन कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। राज्य के खनिज आधारित स्थानीय उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और खनिज राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से CMDC का गठन 7 जून 2001 को किया गया था। वर्तमान में CMDC माइनिंग एंड मार्केटिंग ठेका, उत्खनन ठेका, MDO, अन्वेषण तथा संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से कार्य कर रहा है।
सचिव पी. दयानंद ने बताया कि CMDC द्वारा वर्तमान में टिन, बॉक्साइट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैंगनीज, कोरंडम, डोलोमाइट और कोयला सहित 9 खनिजों में खनन, मार्केटिंग एवं अन्वेषण किया जा रहा है। विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए टिन अयस्क की खरीदी से आजीविका के नए अवसर सृजित हुए हैं। संयुक्त उपक्रम के माध्यम से टिन स्मेल्टर का संचालन भी किया जा रहा है, और टिन को क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में अनुसूचित जनजाति वर्ग को टिन का सही मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया है। टिन का क्रय मूल्य बढ़कर 1926 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जिससे लगभग तीन गुना अधिक आय जनजातीय परिवारों को प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही ऑनलाइन क्रय और रियल-टाइम भुगतान प्रणाली लागू की गई है। इस उद्देश्य से TIN – Tribal Incentive for Natural Resources पोर्टल तैयार किया जा रहा है।
क्रिटिकल मिनरल (Chhattisgarh Mineral Revenue) के क्षेत्र में CMDC द्वारा MOIL के सहयोग से बलरामपुर जिले में मैंगनीज और ग्रेफाइट का अन्वेषण किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वहीं, कोल इंडिया लिमिटेड और CMDC के बीच क्रिटिकल मिनरल के अन्वेषण एवं खनन को लेकर समझौता हो चुका है। यह सहयोग केवल खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खनिज संवर्धन, प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और युवाओं के लिए कौशल विकास को भी बढ़ावा देगा।
सचिव (Chhattisgarh Mineral Revenue) ने बताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में खनिज नीलामी में पारदर्शिता लाई गई है। MSTC के माध्यम से की गई ई-नीलामी से लौह अयस्क की बिक्री में रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुआ है, जबकि उत्खनन लागत न्यूनतम रही है। आरीडोंगरी खदान से पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 28.65 करोड़ रुपये का राजस्व राज्य शासन को मिला, वहीं CMDC को लगभग 24 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच CSR मद में 1.10 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। आरीडोंगरी खदान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 200 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। उत्पादन क्षमता को 5 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन प्रतिवर्ष करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
बैलाडिला डिपॉजिट-4 और 13 में CMDC-NMDC संयुक्त उपक्रम के तहत शीघ्र खनन शुरू होगा। पूर्ण उत्पादन की स्थिति में राज्य को लगभग 7 हजार करोड़ रुपये और CMDC को 3 हजार करोड़ रुपये के राजस्व की संभावना है। वहीं महासमुंद जिले में हीरा धारित किम्बरलाइट की उपस्थिति के संकेत मिले हैं, जिसकी पुष्टि के लिए ड्रिलिंग जारी है।
सचिव ने बताया कि केरवा कोल परियोजना में 15.85 प्रतिशत प्रीमियम पर MDO का चयन किया गया है, जिससे राज्य को लगभग 150 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। साथ ही डोलोमाइट, कोरंडम, कॉपर और अन्य क्रिटिकल मिनरल में भी नई परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।
भविष्य की कार्ययोजना के तहत लौह अयस्क, बॉक्साइट, डोलोमाइट और क्रिटिकल मिनरल में उत्पादन क्षमता बढ़ाकर राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में CMDC की भूमिका लगातार मजबूत की जा रही है।


