सीजी भास्कर 19 जनवरी इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेले गए निर्णायक वनडे ने भारतीय टीम के लिए कई असहज सवाल छोड़ दिए। न्यूजीलैंड ने 41 रनों की जीत के साथ न सिर्फ सीरीज अपने नाम की, बल्कि भारतीय सरजमीं पर 37 साल पुराना सूखा भी खत्म कर दिया। इस हार के साथ (IND vs NZ Home Series Loss) भारतीय क्रिकेट के नए दौर की कठिन शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
कप्तान गिल की निराशा, शब्दों में साफ झलका दर्द
मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल ने बिना किसी खिलाड़ी को कटघरे में खड़ा किए टीम की सामूहिक नाकामी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि 1-1 की बराबरी के बाद निर्णायक मुकाबले में जिस मानसिक मजबूती और ऊर्जा की जरूरत थी, वह मैदान पर नजर नहीं आई। गिल के मुताबिक, कुछ फैसले और कुछ पल ऐसे रहे, जहां टीम पीछे रह गई—यही (Shubman Gill Statement) की सबसे बड़ी सीख है।
टॉप ऑर्डर की लड़खड़ाहट फिर बनी समस्या
भारतीय पारी की शुरुआत एक बार फिर टीम के लिए कमजोर कड़ी साबित हुई। अहम मैच में शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से मध्यक्रम पर दबाव बढ़ता चला गया। गिल ने इशारों में माना कि बार-बार दोहराई जा रही यही गलतियां टीम को भारी पड़ रही हैं। यह मुद्दा अब (India Batting Collapse) के रूप में चर्चा में है।
फील्डिंग और मौके, जो हाथ से फिसल गए
मैच के दौरान कुछ आसान कैच और रन-आउट के मौके भारत के पक्ष में थे, लेकिन वे भुनाए नहीं जा सके। कप्तान ने स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मौके मैच का रुख तय करते हैं। यही छोटी-छोटी चूकें न्यूजीलैंड के पक्ष में बड़ा फर्क बन गईं।
कीवी टीम ने दिखाया संयम और मैच की समझ
न्यूजीलैंड की टीम कई बड़े नामों के बिना मैदान में उतरी थी, फिर भी उनके बल्लेबाजों ने शुरुआत को जिम्मेदारी से बड़े स्कोर में बदला। भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाते हुए उन्होंने मैच को अपने नियंत्रण में रखा। यह प्रदर्शन (New Zealand ODI Victory) के तौर पर याद किया जाएगा।
आत्ममंथन का समय
सीरीज हारने के बाद कप्तान गिल ने साफ किया कि अब टीम को पीछे मुड़कर देखने और ईमानदार आत्मविश्लेषण की जरूरत है। किन क्षेत्रों में सुधार चाहिए, किन फैसलों पर दोबारा सोच जरूरी है—यह सब आने वाले मुकाबलों की दिशा तय करेगा। घरेलू हार ने यह जता दिया है कि सिर्फ नाम नहीं, मैदान पर निरंतरता ही जीत दिलाती है।




